गोल्ड और सिल्वर की कीमतें 29 दिसंबर को क्रैश कर गई थीं। इससे दोनों की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई से नीचे आ गई हैं। सवाल है कि क्या इस करेक्शन के बाद यह गोल्ड और सिल्वर में निवेश करने का सही समय है? या 2025 में जबर्दस्त तेजी के बाद 2026 में गोल्ड और सिल्वर में कंसॉलिडेशन जारी रह सकता है?
कीमतें क्रैश करने की वजह प्रॉफिट बुकिंग
एक्सपर्ट्स का कहना है कि 29 दिसंबर को बुलियन में आई गिरावट की वजह मुनाफावसूली थी। पिछले कुछ हफ्तों में Gold और Silver में गजब की तेजी दिखी थी। कम समय में कीमतों में ज्यादा उछाल के बाद आम तौर पर बिकवाली देखने को मिलती है। OANDA में सीनियर मार्केट एनालिस्ट केल्विन वोंग ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में आई तेजी के बाद बड़ी गिरावट तय थी। उधार के पैसे से किए गए तेजी के सौदे जब काटे गए तब कीमतें दबाव में आ गईं।
30 दिसंबर को गोल्ड में रिकवरी
30 दिसंबर को गोल्ड में रिकवरी देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड 0.7 फीसदी चढ़कर 4,361.71 डॉलर प्रति औंस था। हालांकि, यह 26 दिसंबर को अपने 4,549.71 डॉलर प्रति औंस के ऑल-टाइम हाई से काफी नीचे है। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स (फरवरी डिलीवरी) भी 0.8 फीसदी की तेजी के साथ 4,377.20 डॉलर प्रति औंस था। इधर, इंडिया में भी गोल्ड फ्यूचर्स में तेजी दिखी। कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर दिन में 2:19 बजे गोल्ड फ्यूचर्स 824 रुपये यानी 0.61 फीसदी की मजबूती के साथ 1,35,766 रुपये प्रति 10 ग्राम था।
गोल्ड में संस्थागत डिमांड स्ट्रॉन्ग बने रहने की उम्मीद
मेहता इक्विटीज के वीपी (कमोडिटीज) राहुल कलांतरी ने कहा कि बुलियन में 29 दिसंबर को आई गिरावट की वजह टेक्निकल थी। इसमें लॉन्ग पोजीशन पर दबाव सीएमई ग्रुप की तरफ से मार्जिन बढ़ाने का फैसला शामिल है। 2025 में गोल्ड के मुकाबले सिल्वर का रिटर्न ज्यादा रहा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि सिल्वर का प्रदर्शन आगे इकोनॉमिक ग्रोथ पर निर्भर करेगा। अगर ग्रोथ में किसी तरह की बाधा आती है तो चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दिख सकती है। इसके उलट गोल्ड की इंस्टीट्यूशनल डिमांड स्ट्रॉन्ग बने रहने की उम्मीद है।
क्या आपको निवेश करना चाहिए?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि 29 दिसंबर को आई गिरावट का सोने और चांदी के लॉन्ग टर्म आउटलुक पर कोई असर नहीं पड़ा है। इनवेस्टर्स गिरावट के इस मौके का इस्तेमाल निवेश के लिए कर सकते हैं। खासकर गोल्ड निवेश के लिए अट्रैक्टिव दिख रहा है। इसकी वजह यह है कि ग्लोबल इकोनॉमी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इंटरेस्ट रेट में नरमी का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है। इससे गोल्ड को सपोर्ट मिलेगा।