Gold Silver Outlook: क्या नए साल 2026 में भी गोल्ड और सिल्वर में जारी रहेगी तेजी?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड में तेजी की कई वजहें हैं। इनमें जियोपॉलिटिकल रिस्क, ग्लोबल ग्रोथ में असमानता और इनफ्लेशन को लेकर चिंता शामिल हैं। इन वजहों से सुरक्षित निवेश के लिए गोल्ड की मांग स्ट्रॉन्ग बनी हुई है। अमेरिका सहित कुछ बड़े देशों में मॉनटेरी पॉलिसी में नरमी की उम्मीदों से भी गोल्ड को सपोर्ट मिल रहा है

अपडेटेड Dec 25, 2025 पर 4:35 PM
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सुरक्षित निवेश के लिहाज से गोल्ड में दिलचस्पी बनी हुई है। 2026 के लिए गोल्ड का आउटलुक पॉजिटिव है।

गोल्ड में 25 दिसंबर को शुरुआती कारोबार में तेजी दिखी। इसकी वजह ग्लोबल अनिश्चितता के बीच गोल्ड की स्ट्रॉन्ग डिमांड है। मुंबई में 24 कैरेट स्पॉट गोल्ड का भाव करीब 320 रुपये चढ़कर 1.39 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था। स्पॉट मार्केट में सिल्वर में ज्यादा तेजी दिखी। इसका भाव 1,000 रुपये के उछाल के साथ 2.34 लाख रुपये प्रति किलोग्राम था। सिल्वर में कुछ हफ्तों से लगातार तेजी दिख रही है।

इन वजहों से गोल्ड में तेजी जारी रहने की उम्मीद

एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड में तेजी की कई वजहें हैं। इनमें जियोपॉलिटिकल रिस्क, ग्लोबल ग्रोथ में असमानता और इनफ्लेशन को लेकर चिंता शामिल हैं। इन वजहों से सुरक्षित निवेश के लिए गोल्ड की मांग स्ट्रॉन्ग बनी हुई है। अमेरिका सहित कुछ बड़े देशों में मॉनटेरी पॉलिसी में नरमी की उम्मीदों से भी गोल्ड को सपोर्ट मिल रहा है। कम इंटरेस्ट रेट वाले माहौल में गोल्ड की चमक बढ़ जाती है।


2026 में गोल्ड की कीमतें नई ऊंचाई पर होंगी

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वाइस प्रेसिडेंट अक्षा कंबोज ने कहा कि गोल्ड के कंरेंट प्राइसेज से इनमें स्ट्रॉन्ग पॉजिटिव मोमेंटम का संकेत मिलता है। सुरक्षित निवेश के लिहाज से गोल्ड में दिलचस्पी बनी हुई है। 2026 के लिए गोल्ड का आउटलुक पॉजिटिव है। कई एनालिस्ट्स ने अगले साल भी गोल्ड में तेजी जारी रहने का अनुमान जताया है। उनका मानना है कि अगले साल गोल्ड की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंच जाएंगी।

गोल्ड के मुकाबले चांदी में ज्यादा उछाल

गोल्ड के मुकाबले सिल्वर की कीमतों में ज्यादा तेजी देखने को मिली है। निवेश के साथ ही स्ट्रॉन्ग इंडस्ट्रियल डिमांड का असर चांदी की कीमतों पर पड़ रहा है। कई इंडस्ट्रीज में मैन्युफैक्चरिंग के लिए चांदी का इस्तेमाल होता है। इनमें रिन्यूएबल एनर्जी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स शामिल हैं। इंडस्ट्री की जरूरत के मुकाबले चांदी की सप्लाई कम है। इसका सीधा असर इसकी कीमतों पर पड़ रहा है।

सिल्वर की सप्लाई इंडिस्ट्रियल डिमांड से कम

INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दसानी ने कहा कि ग्लोबल सिल्वर मार्केट पर स्ट्रक्चरल दबाव दिख रहा है। इसकी वजह यह है कि माइनिंग से सिल्वर का प्रोडक्शन इसकी स्ट्रॉन्ग डिमांड के मुकाबले कम है। उन्होंने कहा, "करीब 70 फीसदी सिल्वर का उत्पादन दूसरे मेटल्स का बायप्रोडक्ट है।" उन्होंने ज्यादा डिमांड की वजह से इनवेंट्री में कमी आई है और एक्सचेंजों में भी ज्यादा स्टॉक नहीं बचा है। फाइनेंशियल एसेट्स के रूप में भी सिल्वर की डिमांड बढ़ी है।

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5-10 फीसदी निवेश गोल्ड में बनाए रखने की सलाह

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी सोने और चांदी दोनों में सुरक्षित निवेश के लिए इनवेस्टर्स पैसे लगा रहे हैं। इसका मतलब है कि आने वाले समय में भी दोनों मेटल्स की चमक बनी रहेगी। हालांकि, आगे अमेरिका सहित दूसरे देशों में इंटरेस्ट रेट में कमी का असर गोल्ड की कीमतों पर पड़ सकता है। बीच-बीच में मुनाफावसूली की वजह से भी कीमतों में थोड़ी गिरावट आ सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनवेस्टर्स को गोल्ड में 5-10 फीसदी तक निवेश बनाए रखना चाहिए।

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