सोने और चांदी में 24 फरवरी को भारत में गिरावट आई। विदेश में चांदी में तेजी देखने को मिली। कॉमेक्स में गोल्ड 0.93 फीसदी गिरकर 5,176.80 डॉलर प्रति औंस था। चांदी 0.96 के उछाल के साथ 87.40 डॉलर प्रति औंस रही। कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स दोनों में बड़ी गिरावट दिखी।
शाम के कारोबार में सोने और चांदी में कमजोरी
MCX में शाम के कारोबार में गोल्ड फ्यूचर्स (अप्रैल डिलीवरी) 6:52 बजे 1,750 रुपये यानी 1.04 फीसदी गिरकर 1,59,916 रुपये प्रति 10 ग्राम चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 4,491 रुपये यानी 1.64 फीसदी की कमजोरी के साथ 2,61,164 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा था।
मुनाफावसूली के चलते बुलियन में गिरावट
सोने में गिरावट की वजह प्रॉफिट-बुकिंग है। लगातार चार दिन की तेजी के बाद इनवेस्टर्स ने मुनाफावसूली की। अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी में अनिश्चितता और मिडिल ईस्ट में बढ़ते टेंशन की वजह से सोने में तेजी देखने को मिली थी। इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वाइस प्रेसिडेंट अक्षा कंबोज ने कहा कि गोल्ड को मजबूत हेजिंग डिमांड का सपोर्ट मिला है। सिल्वर में भी इंडस्ट्रियल डिमांड मजबूत बने रहने से मजबूत देखने को मिली है।
शॉर्ट टर्म में कीमतों में जारी रह सकता है उतार-चढ़ाव
उन्होंने कहा कि शॉर्ट टर्म में बुलियन में उतार-चढ़ाव दिख सकता है। खासकर सिल्वर की कीमतें ऊपर और नीचे जा सकती हैं। लेकिन, ट्रेंड को देखने से इनवेस्टर्स की दिलचस्पी खरीदारी में दिखती है। अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को रद्द कर देने से अनिश्चितता की स्थिति है। खासकर रिफंड को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने पहले नया 10 फीसदी टैरिफ का ऐलान किया। बाद में उसे बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया।
गोल्ड और सिल्वर में डिमांड स्ट्रॉन्ग
कोटक सिक्योरिटीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, "इनवेस्टर्स की प्रॉफिट-बुकिंग से गोल्ड 5,200 डॉलर प्रति औंस के नीचे चला गया। इससे पहले गोल्ड में लगातर तेजी दिखी थी। हालांकि, गिरावट के बावजूद बुलियन में डिमांड स्ट्रॉन्ग है। इसमें सुरक्षित निवेश के लिए सोने और चांदी की अच्छी डिमांड का हाथ है। हेजिंग डिमांड भी स्ट्रॉन्ग है। बाजार को यूएस कॉन्फिडेंस और मैन्युफैक्चरिंग डेटा का इंतजार है। " एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड और चांदी की कीमतों पर अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी, जियोपॉलिटिकल टेंशन और ग्लोबल इकोनॉमिक इंडिकेटर्स का असर दिखता रहेगा।