डिजिटल पेमेंट पर लगने वाले चार्ज के नियमों में बड़ा बदलाव हो सकता है। इसके लिए आज सरकार लोकसभा में कानून में संशोधन पेश कर सकती है। CNBC-आवाज को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक सरकार FPIs को टैक्स छूट देने वाले अध्यादेश पर भी आज बिल पेश कर सकती है। इस पर डिटेल में जानकारी देते हुए सीएबीसी-आवाज के इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर लक्ष्मण राय ने कहा कि डिजिटल पेमेंट पर लगने वाले चार्ज नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी है। इसके लिए सरकार कल लोकसभा में कानून में संशोधन ला सकती है।
उन्होंने आगे बताया इसके लिए Payment and Settlement Systems Act, 2007 में बदलाव का प्रस्ताव है। किन डिजिटल ट्रांजैक्शन पर चार्ज नहीं लगेगा सरकार इसको नोटिफाई करेगी। इस एक्ट के सेक्शन 10A में बदलाव करने का प्रस्ताव है। बता दें कि 1 जनवरी 2020 से चुनिंदा ट्रांजैक्शन को छोड़ बाकी पर चार्ज लगाने पर मनाही है।
अब सरकार टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ अमेंडमेंट बिल ला सकती है। इसका जो सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है उसमें डिजिटल ट्रांजैक्शन से जुड़े कानून में प्रस्तावित बदलाव शामिल है। सरकार इस बिल के जरिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 में बदलाव करना चाहती है।
बताते चलें कि अभी हम जितने भी डिजिटल ट्रांजैक्शन करते हैं,चाहे यूपीआई ट्रांजैक्शन हो या रुपए डेबिट कार्ड से होने वाला ट्रांजैक्शन है,उस पर हमें कहीं कोई चार्ज नहीं देना पड़ता है। जैसे एमडीआर चार्जेज वगैरह नहीं देने पड़ते। सरकार ने 2020 से एक कानून लागू कर रखा है जिसके तहत किसी भी डिजिटल ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लिया जा सकता। सिर्फ चुनिंदा हाई वैल्यू वाले डिजिटल ट्रांजैक्शन पर ही चार्ज की अनुमति है।
अब सरकार इस एक्ट के सेक्शन 10 A में बदलाव करेगी। बदलाव करके सरकार यह नोटीफाई करेगी कि किन-किन डिजिटल ट्रांजैक्शन पर चार्जेज नहीं लेने हैं। इसकी एक लिस्ट जारी होगी। उसके बाद इस लिस्ट से बाहर के जो डिजिटल ट्रांजैक्शन होंगे उस पर मर्चेंट बैंकर या फिर पेमेंट गेटवे को चार्ज लेने की छूट रहेगी। सरकार को लिस्ट जारी करने के लिए एक्ट में अमेंडमेंट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार समय-समय पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ मिलकर नोटिफिकेशन जारी करके ऐसे डिजिटल ट्रांजैक्शन की लिस्ट जारी कर सकती है जिस पर चार्जेज नहीं लेने हैं। जो आइटम इस लिस्ट में नहीं होंगे उन पर चार्ज लेने की छूट रहेगी। दूसरे तरीके से कहें तो आप जो डिजिटल पेमेंट करते हैं उस पर लगने वाले चार्जेज का दायरा या तो छोटा हो सकता है या फिर बढ़ सकता है। सरकार समय-समय पर हालात को देखकर यह फैसला लेगी। इससे जुड़ा हुआ बिल आज सरकार संसद में पेश कर रही है।
बढ़ सकती देशी कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग पर टैक्स छूट समय सीमा
इसके अलावा विदेशी कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग पर टैक्स छूट समय सीमा बढ़ सकती है। टैक्स छूट समय सीमा 2030-31 से बढ़कर 2040-41 की जानी संभव है। FPIs को टैक्स छूट वाले अध्यादेश पर आज ही लोकसभा में बिल पेश हो सकता है।