देश के कई टैक्स प्रैक्टिसनर्स एसोसिएशंस ने फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के लिए जीएसटीआर-9 और जीएसटीआर-9सी फाइल करने की डेडलाइन बढ़ाने की मांग की है। इसकी डेडलाइन 31 दिसंबर है। इनमें बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसायटी (बीसीएसी), मध्य प्रदेश टैक्स लॉ बार एसोसिएशंस (एमपीटीएलबीए) और कमर्शियल टैक्स प्रैक्टिसनर्स एसोसिएशन-इंदौर सहित कई एसोसिएशंस शामिल हैं। इन एसोसिएशंस का कहना है कि हाल में फॉर्म्स में किए गए बदलावों और तकनीकी दिक्कतों की वजह से कंप्लायंस में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।
अंतिम तारीख तीन महीने बढ़ाने की मांग
BCAS ने अथॉरिटीज को लिखे लेटर में कहा है, "बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसायटी और व्यापक टैक्सपेयर समुदाय की तरफ से हम फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के लिए फॉर्म जीएसटीआर-9 और फॉर्म जीएसटीआर-9सी फाइलिंग की अंतिम तारीख बढ़ाने का अनुरोध करते हैं। हमारा प्रस्ताव है कि सभी टैक्सपेयर्स के लिए अंतिम तारीख कम से कम तीन महीने के लिए बढ़ा दी जाए।"
डेडलाइन बढ़ने से कंप्लायंस में आसानी होगी
मलाड चैंबर ऑफ टैक्स कंसल्टेंट्स ने अपने लेटर में कहा है, "एक्युरेट, फेयर और लिटिगेशन-फ्री कंप्लायंस के लिए हम अथॉरिटीज से विनम्रतापूर्वक FY2024-25 के लिए फॉर्म जीएसटीआर-9 और फॉर्म जीएसटीआर-9सी फाइल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 जनवरी, 2026 करने की मांग करते हैं।"
फॉर्म के फॉरमैट सहित कई तरह के बदलाव हुए है
टैक्स एसोसिएशंस की अंतिम तारीख बढ़ाए जाने की मांग की वजह यह है कि FY2024-25 के लिए फॉर्म जीएसटीआर-9 और फॉर्म जीएसटीआर-9सी के फॉरमैट, इंस्ट्रक्शंस और डिसक्लोजर रिक्वायरमेंट में बदलाव हुआ है। इस साल इस बारे में कई नोटिफिकेशंस इश्यू किए गए। इनमें जून 2024, दिसंबर 2024 और 2025 के मध्य में इश्यू किए गए नोटिफिकेशंस शामिल हैं। इन बदलावों की वजह से रिपोर्टिंग टेबल्स, इंश्ट्रक्शंस और ओवरऑल रिकॉन्सिलेशन फ्रेमवर्क बदल गए। बाद में जीएसटीएन एफएक्यू और एडवायजरीज के जरिए स्पष्टीकरण पेश किया गया।
जीएसटीआर-9 एक सालाना रिटर्न है, जिसमें फाइनेंशियल ईयर के दौरान टैक्सपेयर की तरफ से फाइल किए गए सभी जीएसटी रिटर्न की एक कंसॉलिडेटेड समरी होती है। इसमें आउटवार्ड और इनवार्ड सप्लाइज, चुकाए गए टैक्स और एवेल किए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट की पूरी जानकारी होती है। ऐसे रजिस्टर्ड जीएसटी टैक्सपेयर्स जिनका सालना टर्नओवर 2 करोड़ रुपये से ज्यादा होता है, उन्हें जीएसटीआर-9 फाइल करना होता है।
जीएसटीआर-9सी एक रिकॉन्सिलेशन स्टेटमेंट है, जिसमें जीएसटी रिटर्न में रिपोर्टेड फिगर्स का डिटेल कंपैरिजन शामिल होता है। यह ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट में भी शामिल होता है। इसके साथ उनकी एक्युरेसी का सर्टिफिकेशन भी होता है। जीएसटीआर-9सी उन जीएसटी टैक्सपेयर्स को फाइल करना जरूरी है, जिनका टर्नओवर 5 करोड़ रुपये से ज्यादा है। देर से फाइल करने पर रोजाना 200 रुपये की पेनाल्टी लगती है। इसकी सीमा टर्नओवर का 0.5 फीसदी है।