सरकार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के नियमों को आसान बनाने पर विचार कर रही है। इससे बिजनेसेज पर कंप्लायंस का बोझ घटेगा। इसका ऐलान यूनियन बजट 2026 में हो सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ का असर छोटे उद्यमों यानी एमएसएमई पर पड़ा है। ऐसे में जीएसटी के कंप्लायंस बोझ को कम करने से उन्हें काफी राहत मिलेगी।
कई प्रस्तावों पर चल रहा विचार
सरकार कई तरह के प्रस्तावों पर विचार कर रही है। एक प्रस्ताव के तहत छोटे उद्यमों को तिमाही आधार पर जीएसटी के पेमेंट का विकल्प देने पर विचार हो रहा है। अभी उन्हें हर महीने टैक्स का पेमेंट करना पड़ता है। सूत्रों ने मिंट को यह जानकारी दी। एमएसएमई के रिवाइज्ड नियमों के तहत, सालाना 10 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले बिजनेसेज माइक्रो एंटरप्राइजेज के तहत आते हैं।
पहली दो गलतियों पर सिर्फ चेतावनी
जीएसटी नियमों के क्रियान्वयन में भी सरकार नरमी बरतना चाहती है। इसके तहत रिटर्न फाइलिंग में देरी या अनजाने में हुई गलती पर एमएसएमई को सिर्फ चेतावनी दी जाएगी। ऐसे शुरुआती दो मामलों में उनके ऊपर पेनाल्टी नहीं लगाई जाएगी। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र को मिंट को यह बताया। सेंट्रल जीएसटी एक्ट के सेक्शन 47 के तहत रिटर्न फाइलिंग में देरी पर पेनाल्टी का प्रावधान है।
फाइलिंग में देरी पर रोजाना बढ़ती है पेनाल्टी
जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-3बी और जीएसटीआर-9 जैसे रिटर्न की फाइलिंग में देरी पर रोजाना पेनाल्टी बढ़ती है। यह तब तक बढ़ती रहती है जब तक तय सीमा तक नहीं पहुंच जाती। टैक्स पेमेंट में देरी पर सालाना 18 फीसदी के रेट से इंटरेस्ट भी लगता है। सूत्रों ने बताया कि एमएसएमई मिनिस्ट्री ने ये प्रस्ताव फाइनेंस मिनिस्ट्री को भेजे हैं। इस साल सरकार ने जीएसटी के रेट्स में बड़ी कमी की है। नए रेट्स 22 सितंबर से लागू हो चुके हैं।
अमेरिकी टैरिफ का एमएसएमई पर असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंडिया पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। इसका असर एक्सपोर्ट्स के साथ ही एमएसएमई पर पड़ रहा है। इंडिया में करीब 7.3 करोड़ एमएसएमई हैं, जिनका देश की जीडीपी में करीब 30 फीसदी योगदान है। कुल एक्सपोर्ट्स में इनकी करीब 45 फीसदी हिस्सेदारी है। लंबे समय से छोटे बिजनेसेज पर जीएसटी कंप्लायंस का बोझ घटाने की मांग की जा रही है।
कंप्लायंस खर्च टर्नओवर का 6-8 फीसदी तक
इंडिया एसएमई फोरस के प्रेसिडेंट विनोद कुमार ने मिंट को बताया, "रिटर्न फाइलिंग और इससे जुड़े कंप्लायंसेज को पूरा करने में काफी समय खर्च होता है। इसके लिए अलग मैनपावर की भी जरूरत पड़ती है।" उन्होंने कहा कि ऐसे माइक्रो एंटरप्राइजेज जिनके पास सीमित संसाधन है, उनका कंप्लायंस पर खर्च टर्नओवर का 6-8 फीसदी तक पहुंच जाता है। अधिकारियों ने बताया कि एमएसएमई, फाइनेंस और कॉर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्रीज टैक्स से जुड़े नियमों को आसान बनाने पर चर्चा कर रहे हैं।