सरकार देश में छोटे एयरक्राफ्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए यूनियन बजट 2026 में इनसेंटिव स्कीम का ऐलान कर सकती है। यह सिविल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग ईकोसिस्टम में आत्मनिर्भर बनने की सरकार की कोशिश का हिस्सा होगा। सरकार से जुड़े सूत्रों ने मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2026 को यूनियन बजट पेश करेंगी। हालांकि, सरकार ने अभी बजट पेश होने की तारीख का औपचारिक ऐलान नहीं किया है।
इस स्कीम की अवधि 5 साल के लिए हो सकती है
स्मॉल एयरक्रॉफ्ट्स का मतलब ऐसे प्लेन से है, जिसकी कपैसिटी 20 सीट से कम होती है। इसका इस्तेमाल छोटी दूरी की उड़ानों के लिए होता है। इस बारे में जानकारी देने वाले एक सूत्र ने कहा, "यूनियन बजट 2026 के लिए एक स्कीम तैयार की जा रही है। इस स्कीम से देश में पांच सालों में स्मॉल एयरक्राफ्ट की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। इस स्कीम का फोकस देश में ही डिजाइन, कंपोनेंट्स और एसेंबली पर होगा।"
रीजनल एयर कनेक्टिविटी प्रोग्राम को मिलेगा बढ़ावा
इस पहल से स्मॉल एयरक्राफ्ट की मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता बढ़ेगी। ऐसे विमानों का इस्तेमाल सरकार के रीजनल एयर कनेक्टिविटी प्रोग्राम के लिए किया जा सकेगा। सूत्र ने कहा, "इस स्कीम का मकसद रियल मैन्युफैक्चरिंग कपैसिटी बढ़ाना है।" सूत्रों ने बताया कि अभी एविएशन सेक्टर में स्ट्रक्चरल गैप है। सरकार की उड़ान स्कीम के तहत रीजनल कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिला है। लेकिन एयरक्राफ्ट्स के लिए इंपोर्ट पर निर्भरता बनी हुई है। यह स्कीम इस कमी को दूर करना चाहती है।
अभी विदेशी एयरक्राफ्ट्स पर एयरलाइंस की निर्भरता
भारत में एयरलाइंस कंपनियां रीजनल रूट्स पर हवाई सेवाओं के लिए लीज पर लिए गए एयरक्राफ्ट्स पर निर्भर हैं। विदेशी मैन्युफैक्चरर्स और लेसर्स (Lessors) ये एयरक्राफ्ट उपलब्ध कराते हैं। इससे एयरलाइंस कंपनियों की कॉस्ट काफी बढ़ जाती है। सूत्रों ने कहा कि देश में ही स्मॉल एयक्राफ्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग से विदेशी कंपनियों पर निर्भरता घटेगी। साथ ही एयक्राफ्ट्स की उपलब्धता भी बढ़ेगी।
स्कीम तैयार करने में कई मंत्रालयों की हिस्सेदारी
अभी इस स्कीम की बुनियादी बातों पर विचार हो रहा है। सूत्र ने बताया, "यह माना गया है कि एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग के लिए मंत्रालयों के बीच लंबी अवधि का समन्वय जरूरी है। इसमें रेगुलेटर्स और इंडस्ट्री को भी शामिल करना होगा। प्रोग्राम स्तर की अथॉरिटी या एसपीवी से कई सालों तक एग्जिक्यूशन और कंटिन्यूटी जारी रखने में आसानी होगी। "