हेल्थ इंश्योरेंस होगा महंगा, ये उपाय करें तो नहीं बढ़ेगा आपका प्रीमियम

मार्श-मर्सर बेनिफिट्स सर्वे के मुताबिक, कंपनियों की तरफ से एंपलॉयीज को मिलने वाली हेल्थ पॉलिसीजी (Health Policies) की कॉस्ट इस साल 15 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है

अपडेटेड Apr 22, 2022 पर 2:39 PM
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इंश्योरेंस कंपनियां प्रीमियम बढ़ाने के लिए रेगुलेटर का एप्रूवल हासिल करने की कोशिश कर रही हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमयम में 8 से 15 फीसदी इजाफा हो सकता है।

आपके हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) का प्रीमियम बढ़ने जा रहा है। ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस (Group Health Insurance) का प्रीमियम अप्रैल में बढ़ चुका है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाकी ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम भी रिन्यूएल के वक्त बढ़ना तय है। मार्श-मर्सर बेनिफिट्स सर्वे के मुताबिक, कंपनियों की तरफ से एंपलॉयीज को मिलने वाली हेल्थ पॉलिसीजी (Health Policies) की कॉस्ट इस साल 15 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जल्द इंडिविजुअल हेल्थ पॉलिसी (Individual Health Policy) का प्रीमियम बढ़ने वाला है। इसकी वजह यह है कि कोविड-19 से जुड़े क्लेम की वजह से इंश्योरेंस कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है। इंश्योरेंस कंपनियां प्रीमियम बढ़ाने के लिए रेगुलेटर का एप्रूवल हासिल करने की कोशिश कर रही हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमयम में 8 से 15 फीसदी इजाफा हो सकता है।

कोरोना की महामारी के चलते दुनियाभर में मेडिकल खर्च बढ़ा है। इसका सीधा असर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों पर पड़ा है। सेक्योरनाउ इंश्योरेंस ब्रोकर्स के को-फाउंडर और प्रिंसिपल ऑफिसर अभिषेक बोंडिया ने कहा, "कोविड-19 की वजह से हेल्थ इंश्योरेंस का इस्तेमाल बहुत बढ़ा है। इसके अलावा पेंट-अप डिमांड भी आ रही है। जिन लोगों ने अपनी सर्जरी और प्रोसिजर रोक रखी थी, वे अब उन्हें करा रहे हैं। इससे क्लेम बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर इंश्योरेंस कंपनियों पर पड़ा है।"


उनका मानना है कि हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां हर तीन साल पर क्लेम को देखते हुए रेट्स बढ़ा सकती हैं। पॉलिसीहोल्डर्स के लिए भी एक एज ब्रैकेट से दूसरे में जाने पर प्रीमियम में तेज उछाल आ सकता है। आम तौर पर 35 से 39 साल की उम्र में प्रीमियम स्टेबल रहता है। फिर 40 पार करने के बाद इसमें उछाल आता है।

रिन्यूएल पर प्रीमियम बढ़ने से रोकने के लिए हमें क्या करना चाहिए?

अगर आप यंग हैं तो आपके पास अपेक्षाकृत ज्यादा ऑप्शंस हैं। आप बीमा कंपनियों के प्रीमियम को कम्पेयर कर सकते हैं। अगर एक है जैसी बेनिफिट दूसरी कंपनी दे रही है तो आप अपनी पॉलिसी को पोर्ट करा सकते हैं। आपको ऐसी पॉलिसी पर जोर देना चाहिए, जो पॉपुलर हो। कुछ कंपनियां अपने मौजूदा प्रोडक्ट्स वापस ले लेती हैं और पॉलिसीहोल्डर्स को दूसरे प्रोडक्ट्स में मूव कर देती हैं। इससे प्रीमियम बहुत बढ़ जाता है।

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डिट्टो इंश्योरेंस के को-फाउंडर एस काराकेरा ने कहा, "अगर आप पॉपुलर प्रोडक्ट्स खरीदते हैं, जो 2-3 साल से मार्केट में है तो बीमा कंपनी के पास उस प्रोडक्ट को बंद करने की ज्यादा गुंजाइश नहीं होगी या उसका प्रीमियम बहुत नहीं बढ़ेगा।"

मैं कैसे ऐसा प्रोडक्ट सेलेक्ट कर सकता हूं, जिसे आसानी से पोर्ट कराया जा सकता है?

आपको इसके लिए उन्हीं बातों का ध्यान रखना होगा, जो हम किसी नई पॉलिसी को खरीदने में रखते हैं। प्रीमियम कम होना चाहिए, फीचर को देख लें, हॉस्पिटल्स का कैसलेस नेटवर्क चेक कर लें। फिर आपको क्लेम सेटलमेंट रिकॉर्ड भी देखना होगा। यह भी देख लें कि पॉलिसी सपोर्ट और क्लेम सर्विस के लिए डिजिटल सपोर्ट कैसा है। बोंडिया ने कहा, "आपको ऐसी पॉलिसी चुननी चाहिए, जिसमें नो-क्लेम बोनस ज्यादा हो। इससे आपको एडिशनल प्रीमियम चुकाए बगैर ज्यादा सम-एश्योर्ड मिलेगा।"

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