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शादीशुदा बेटे को करना होगा मां को सपोर्ट, देना होगा 5000 रुपये भत्ता, कोर्ट का आदेश

हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल से बच्चे बच नहीं सकते। चाहे उनकी अपनी शादी हो चुकी हो या वे अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा रहे हों

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 20, 2025 पर 12:39 PM
शादीशुदा बेटे को करना होगा मां को सपोर्ट, देना होगा 5000 रुपये भत्ता, कोर्ट का आदेश
हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल से बच्चे बच नहीं सकते।

हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल से बच्चे बच नहीं सकते। चाहे उनकी अपनी शादी हो चुकी हो या वे अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा रहे हों। केरल हाई कोर्ट ने कहा कि मां को अपने बच्चों से आर्थिक सहायता मांगने का स्वतंत्र अधिकार है। यह इस बात पर निर्भर नहीं करता कि उसका पति जीवित है या कमाई करता है।

यह फैसला उस मामले में आया, जिसमें 60 वर्षीय महिला ने अपने बेटे से मंथली भरण-पोषण की मांग की थी। महिला ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उसके पास कोई नौकरी या इनकम का साधन नहीं है, इसलिए बेटे से मदद जरूरी है। जुलाई 2025 में फैमिली कोर्ट ने बेटे को हर महीने 5,000 रुपये देने का आदेश दिया था। महिला इस अमाउंट से संतुष्ट नहीं थीं और उन्होंने इस फैसले को केरल हाई कोर्ट में चुनौती दी।

हाई कोर्ट ने 4 नवंबर को फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए 5,000 रुपये मंथली भरण-पोषण को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए यह फैसला न्यायसंगत और उचित है। सुनवाई के दौरान बेटे ने दलील दी कि उसकी मां पशुपालन करके कमाई करती हैं। उसके पिता, जो मछुआरे हैं और जिनके पास नाव है, पहले से ही उनका खर्च उठा रहे हैं। बेटे ने यह भी कहा कि उसकी अपनी पत्नी और बच्चा है, इसलिए उस पर एक्स्ट्रा बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।

हालांकि, अदालत ने बेटे की सभी दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दिया गया कि मां को पशुपालन से इनकम होती है। अदालत ने यह टिप्पणी भी की कि एक संपन्न बेटे का अपनी बुजुर्ग मां से शारीरिक मेहनत की उम्मीद करना गलत और अमानवीय है। पशुपालन एक शारीरिक रूप से कठिन काम है।

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