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होमलोन पर ज्यादा ब्याज क्यों चुकाएं जब कम ब्याज पर शिफ्ट होने का है मौका

अगर कोई बैंक आपके मौजूदा होम लोन की दर से आधा फीसदी कम ब्याज दर पर होम लोन ऑफर करता है तो आपको इस विकल्प को चुनने में देरी नहीं करनी चाहिए

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 06, 2020 पर 5:12 PM
होमलोन पर ज्यादा ब्याज क्यों चुकाएं जब कम ब्याज पर शिफ्ट होने का है मौका

प्रीति कुलकर्णी

इस बार फेस्टिव सीजन में घर खरीदने वालों के पास विकल्पों की भरमार है। रियल एस्टेट डिवेलपर्स तगड़े डिस्काउंट दे रहे हैं, कुछ राज्य सरकारों ने स्टांप ड्यूटी घटा दी है और बैंकों में कम ब्याज दरों पर होम लोन देने की होड़ मची हुई है।

ब्याज दरें पहले ही 15 साल के निचले स्तर पर बनी हुई हैं। मिसाल के तौर पर, कोटक महिंद्रा बैंक 6.75 फीसदी ब्याज पर होम लोन ऑफर कर रहा है। बैंक ऑफ बड़ौदा की होम लोन की दरें 6.85 फीसदी से शुरू हो रही हैं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने 75 लाख रुपये से ज्यादा के लोन्स पर 0.25 फीसदी की रियायत देने का ऐलान किया है। हालांकि, यह छूट क्रेडिट स्कोर पर आधारित होगी। साथ ही इसके लिए आवेदन भी योनो ऐप के जरिए करना होगा।

अगर आप अपने इस्तेमाल के लिए घर खरीदना चाहते हैं और आपको भरोसा है कि आपकी कमाई में आने वाले दिनों में कोई दिक्कत नहीं पैदा होगी तो आपके लिए घर खरीदने का शायद यह सबसे अच्छा मौका है।

घर खरीदने वाले नए ग्राहकों को घर खरीदने और नया लोन लेने से पहले शायद कई चीजों पर गौर करना पड़ता है, लेकिन अगर आप मौजूदा ग्राहक हैं तो आपके लिए विकल्पों का चुनाव करना कहीं ज्यादा आसान है। इन ऑफर्स का मकसद दूसरे बैंकों के मौजूदा ग्राहकों को अपनी ओर खींचना भी है।

अगर आपने पुराने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स आधारित उधारी दर (एमसीएलआर) या बेस रेट व्यवस्था के तहत लोन लिया था तो आपको खासतौर पर इसे बदल लेना चाहिए।

 स्विच करना है जरूरी

अगर नया लोन आपके मौजूदा लोन से आधा फीसदी कम पर मिल रहा है तो होम लोन रीफाइनेंसिंग में देरी नहीं करनी चाहिए।

मान लीजिए आपने 75 लाख रुपये का लोन 20 साल की अवधि के लिए लिया था। इसमें से तीन साल गुजर चुके हैं। मान लेते हैं कि आप फिलहाल 8 फीसदी सालाना की दर से ब्याज चुका रहे हैं। अगर आप किसी दूसरे बैंक के यहां अपना लोन स्विच करते हैं जो कि 7.5 फीसदी सालाना की दर पर आपको यह सुविधा दे रहा है तो आप बकाया की अवधि में 8.15 लाख रुपये बचा लेंगे और आपके शेड्यूल से 13 ईएमआई घट जाएंगी।

लोन कंसल्टेंसी फर्म मॉर्टगेज वर्ल्ड के फाउंडर विपुल पटेल कहते हैं, “बल्कि अगर अंतर .025 से 0.35 फीसदी का भी है तो भी लोन को स्विच कराना फायदेमंद रहेगा।” लेकिन, लोन स्विच करने से पहले इसके नफे-नुकसान का आकलन ठीक तरह से कर लेना बेहतर होगा।

कई बैंकों ने अपनी प्रोसेसिंग फीस भी घटा दी है और आपको कोई फोरक्लोजर चार्ज भी नहीं चुकाना पड़ता है।

मिसाल के तौर पर, एसबीआई अप्रूव किए गए प्रोजेक्ट्स के लिए लोन लेने पर कोई प्रोसेसिंग फीस नहीं ले रहा है।

बैंकबाजार.कॉम के फाउंडर और सीईओ आदिल शेट्टी के मुताबिक, “स्पेशल ऑफर्स ज्यादातर प्रोसेसिंग फीस को घटाने या इसे खत्म करने से जुड़े हुए हैं। ब्याज दर में कटौती कम है और यह आमतौर पर 0.05 फीसदी की रेंज में है. ये ऑफर्स अलग-अलग बैंकों में अलग-अलग हैं।”

1 अक्तूबर 2019 के बाद स्वीकृत हुए सभी रिटेल लोन्स को एक एक्सटर्नल बेंचमार्क से लिंक किया जाना है जो कि ज्यादातर बैंकों के मामले में रिजर्व बैंक (आरबीआई) का रेपो रेट है। इससे पारदर्शिता में इजाफा होता है।

जब आरबीआई ने मार्च से मई के दौरान रेपो रेट को 1.15 फीसदी घटाया था तो सभी बैंकों को रेट में हुई इस पूरी कटौती को अपने रेपो-लिंक्ड लोन वाले ग्राहकों को देना पड़ा था।

पहले के ज्यादातर लोन ग्राहकों की शिकायत रहती थी कि जब भी पॉलिसी रेट्स में इजाफा होता है तो बैंक तुरंत ब्याज दरों में इजाफा कर देते हैं, जबकि रेट्स में कटौती होने पर वे ब्याज दरों को घटाने में वैसी तेजी नहीं दिखाते हैं।

अब जब भी रेपो रेट में कटौती होती है तो बैंकों के पास इस पूरे फायदे को ग्राहकों को देने के अलावा कोई चारा नहीं रहता है।

हालांकि, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए एक्सटर्नल बेंचमार्किंग सिस्टम का पालन करने की कोई बाध्यता नहीं है, लेकिन इस सेक्टर में इतनी तगड़ी प्रतिस्पर्धा है कि वे दरों को निचले स्तर पर रखने के लिए मजबूर हैं।

अगर कोई मार्केट के मुताबिक रेट्स में कटौती नहीं करता है तो आप के पास अपना लोन दूसरे बैंक के यहां ट्रांसफर कराने का विपल्प मौजूद है। हालांकि, बेहतर यही होगा कि आप अपने मौजूदा बैंक से ही इसके लिए सौदेबाजी करें।

अपने बैंक से बातचीत करें

भले ही आपका लोन आरएलएलआर से लिंक्ड है, लेकिन दूसरे बैंकों के भी फेस्टिव ऑफर्स पर भी नजर डाल लीजिए।

शेट्टी कहते हैं, “सभी फेस्टिव ऑफर्स नए कस्टमर्स के लिए हैं और इनका मौजूदा ग्राहकों पर कोई असर नहीं होगा। आमतौर पर लोन का स्प्रेड पूरे लोन टेन्योर के लिए तब तक वही रहता है जब तक कि उधार लेने वाले के क्रेडिट स्कोर में कोई बड़ा बदलाव न आ गया हो।”

लोन का स्प्रेड फाइनल लोन रेट और रेपो रेट (या कोई दूसरा एक्सटर्नल बेंचमार्क जिससे आपके बैंक ने आपका लोन रेट लिंक किया हो) के बीच का अंतर होता है। यह मौजूदा लोन ग्राहकों के लिए वही रहेगा क्योंकि रेपो रेट में अभी कोई बदलाव नहीं हुआ है।

लेकिन, बैंकों ने नए लोन ग्राहकों के लिए अपने स्प्रेड्स में कटौती की है। आरबीआई के रेगुलेशंस के मुताबिक, आपके लोन कॉन्ट्रैक्ट में दर्ज स्प्रेड तीन साल के लिए स्थिर रहेगा।

मिसाल के तौर पर, बैंक ऑफ बड़ौदा ने नए लोन ग्राहकों के लिए स्प्रेड को 0.15 फीसदी घटा दिया है। चूंकि, रेपो रेट में कोई कटौती नहीं हुई है, ऐसे में मौजूदा ग्राहकों के लिए लोन कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत होने के बाद से स्प्रेड कम से कम तीन साल तक वही रहेगी।

पटेल कहते हैं, “कुछ बैंकों ने फेस्टिव सीजन में क्रेडिट और रिस्क स्प्रेड को कम किया है ताकि नए ग्राहकों को इनका फायदा दिया जा सके। मौजूदा ग्राहकों के लिए स्प्रेड लोन लिए जाते वक्त तय हुई दर पर ही रहेगी।”

अगर आप अब अपने बैंक को बदलना चाहते हैं तो आपका नया बैंक आपको नए ग्राहक के तौर पर लेगा और ऐसे में घटी हुई होम लोन दरों के फायदे आपको देगा और आपको रियायती दरों और फीस का फायदा मिलेगा।

पटेल कहते हैं, “हमारी सलाह यह है कि आप अपने मौजूदा बैंक से बातचीत करें और दरों में रियायत की मांग करें। अगर यह बातचीत परवान नहीं चढ़ पाती है तो आप फेस्टिव सीजन बेनेफिट स्कीमों का अधिकतम फायदा उठाने के लिए नए बैंक के यहां जा सकते हैं और बैलेंस ट्रांसफर सुविधा ले सकते हैं।”

अपने मौजूदा बैंक से बेहतर ब्याज दर की मांग करने से आप कई दिक्कतों से बच सकते हैं। इससे आप दस्तावेज इकट्ठे करने से लेकर नए बैंक के चार्जेज से भी बच जाएंगे।

शेट्टी कहते हैं, “लोन के शुरुआती सालों में अपने लोन को कम ब्याज दर पर शिफ्ट करने से आप पर पड़ने वाला ब्याज का बोझ काफी कम हो जाता है। हालांकि, रीफाइनेंसिंग का अपना खर्च होता है, इसमें प्रोसेसिंग, मॉर्टगेज डीड और लीगल फीस जैसे खर्च शामिल होते हैं। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि अपने होम लोन की रीफाइनेंसिंग की लागत आपके मौजूदा लोन के मुकाबले ज्यादा महंगी न साबित हो।”करने की जरूरत है।

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