भारत में रिटायरमेंट प्लानिंग अब सिर्फ अपने भविष्य की सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। आज की पीढ़ी को न केवल अपनी बुढ़ापे की तैयारी करनी पड़ती है, बल्कि अपने माता-पिता की आर्थिक जरूरतों का भी ध्यान रखना पड़ता है। यह दोहरी जिम्मेदारी कई बार लोगों को उलझन और दबाव में डाल देती है।
