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UPI का इस्तेमाल मुफ्त, फिर पैसा कैसे कमाते हैं फोनपे, गूगलपे और पेटीएम जैसे ऐप्स?

UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त हैं, फिर भी PhonePe, GooglePay और Paytm जैसे ऐप्स हजारों करोड़ की कमाई कर रहे हैं। मर्चेंट पेमेंट, क्रेडिट कार्ड, बिल पेमेंट और डिवाइस रेंटल से कैसे बनता है रेवेन्यू मॉडल, समझिए पूरा गणित।

Edited By: Suneel Kumarअपडेटेड Mar 01, 2026 पर 8:26 PM
UPI का इस्तेमाल मुफ्त, फिर पैसा कैसे कमाते हैं फोनपे, गूगलपे और पेटीएम जैसे ऐप्स?
क्रेडिट कार्ड प्रोसेसिंग कमाई का अहम जरिया बना हुआ है।

वित्त मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि UPI अब देश में सबसे पसंदीदा पेमेंट तरीका बन चुका है। कुल लेनदेन का 57 प्रतिशत हिस्सा UPI से हो रहा है। बर्नस्टीन की रिपोर्ट भी बताती है कि कुल कैशलेस ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का लगभग 90 प्रतिशत और कुल वैल्यू का 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा UPI से आता है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब ज्यादातर UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR शून्य है, तो पेमेंट प्लेटफॉर्म कमाई कैसे कर रहे हैं?

कैशलेस इकोनॉमी का बढ़ता दायरा

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा अब कैशलेस पेमेंट के जरिए हो रहा है। फिर भी UPI ट्रांजैक्शन पर कोई फीस नहीं लगती। 2020 से UPI पर MDR शून्य है। पीयर-टू-पीयर यानी P2P ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का बड़ा हिस्सा हैं, लेकिन नेट रेवेन्यू पूल में इनका योगदान 10 प्रतिशत से भी कम है।

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