Income Plus Arbitrage FoF: इस स्कीम में निवेश कर आप लाखों रुपये टैक्स बचा सकते हैं, जानिए कैसे

Income Plus Arbitrage FoF डेट फंड और ऑर्बिट्राज फंड का मिक्स है। यह डेट फंड में 35 फीसदी तक निवेशकर सकता है। बाकी 65 फीसदी का निवेश यह ऑर्बिट्राज में कर सकता है। इस फंड का मुख्य मकसद इनवेस्टर्स की टैक्स लायबिलिटी घटाना है

अपडेटेड Jun 16, 2025 पर 1:14 PM
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इस साल अप्रैल 2025 के अंत में इस स्कीम की कैटेगरी का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट 3,161 करोड़ रुपये था।

क्या टैक्स के खराब नियम की वजह से आप डेट फंड में इनवेस्ट नहीं करना चाहते? अगर हां तो आपके लिए अच्छी खबर है। इनकम प्लस ऑर्बिट्राज एफओएफ आपकी यह मुश्किल दूर कर देगा। एसेट मैनेजमेंट कंपनियों ने इनवेस्टर्स पर टैक्स का बोझ कम करने के लिए इस फंड को लॉन्च किया है। यह स्कीम लाखों रुपये टैक्स बचाने में आपकी मदद कर सकती है। आइए जानते हैं कैसे।

क्या है इनकम प्लस ऑर्बिट्रांज एफओएफ?

Income Plus Arbitrage FoF डेट फंड और ऑर्बिट्राज फंड का मिक्स है। यह डेट फंड में 35 फीसदी तक निवेशकर सकता है। बाकी 65 फीसदी का निवेश यह ऑर्बिट्राज फंड में कर सकता है। इस फंड का मुख्य मकसद इनवेस्टर्स की टैक्स लायबिलिटी घटाना है। पिछले 6-7 महीनों में कई फंड हाउसेज की दिलचस्पी इस तरह के फंड में बढ़ी है। कुछ फंड हाउस अभी ऐसी स्कीम लॉन्च करने जा रहे हैं, जिसमें डेट और ऑर्बिट्राज की स्ट्रेटेजी शामिल हैं।


इस फंड का मकसद क्या है?

इस साल अप्रैल 2025 के अंत में इस स्कीम की कैटेगरी का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट 3,161 करोड़ रुपये था। इस फंड का मकसद ट्रेडिशनल लिक्विड या शॉर्ट टर्म डेट फंड से ज्यादा रिटर्न जेनरेट करना है। आर्बिट्राज में 65 फीसदी तक निवेश करने की वजह से इस फंड पर इक्विटी फंड के टैक्स के नियम लागू होते हैं। इससे इनवेस्टर पर टैक्स का बोझ घट जाता है। 2023 के यूनियन बजट में सरकार ने डेट फंड के टैक्स के नियमों में बदलाव कर दिया था। इससे डेट फंड के रिटर्न पर टैक्स बढ़ गया, जिससे इस फंड का अट्रैक्शन घट गया।

AMC ने यह फंड क्यों पेश किया?

2023 के यूनियन बजट में सरकार ने डेट फंड के टैक्स के नियमों में बदलाव किया। इसके मुताबिक, डेट फंड्स से हुए कैपिटल गेंस पर इनवेस्टर को अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा। इसका मतलब है कि अगर कोई इनवेस्टर्स 30 फीसदी टैक्स स्लैब में आता है तो डेट फंड के रिटर्न पर उसे 30 फीसदी टैक्स चुकाना पड़ेगा। इतना ज्यादा टैक्स चुकानी की वजह से इस फंड में निवेश से मिलने वाला असल रिटर्न काफी कम हो जाता है।

टैक्स के नियम क्या हैं?

इक्विटी फंड के गेंस पर टैक्स के नियम अलग है। इस फंड को निवेश के 2 साल बाद बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के नियम लागू होते हैं। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर 12.5 फीसदी टैक्स लगता है। जुलाई 2024 में पेश यूनियन बजट में सरकार ने FoF कैटेगरी के फंडों के लिए टैक्स के नियमों में बदलाव किया। सरकार ने कहा कि FoF के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर 12.5 फीसदी का टैक्स लागू होगा। इसके लिए सिर्फ दो शर्तें हैं। पहला यह कि इसमें निवेश कम से कम 2 साल तक बनाए रखना होगा। दूसरा, डेट फंड में इसका निवेश तय सीमा से ज्याद नहीं होनी चाहिए।

किन कंपनियों ने पेश की यह स्कीम?

एसेट मैनेजमेंट कंपनियों ने इस नियम का फायदा उठाते हुए नए FoF लॉन्च किए या अपनी मौजूदा स्कीमों में इस नियम के हिसाब से बदलाव करने की कोशिश की। एसबीआई म्यूचुअल फंड, निप्पॉन फंड, बंधन सहित कई एएमसी कंपनियों ने इस कैटेगरी की स्कीम पेश की हैं। इस स्कीम में ऐसे निवेशक ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं, जो डेट फंडों में निवेश करना चाहते हैं।

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इनवेस्टर्स को ऐसे होता है फायदा

मान लीजिए किसी डेट फंड में निवेश से आपको 1 लाख रुपये का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस होता है। टैक्स के नियम के हिसाब से अगर आप 30 फीसदी इनकम टैक्स स्लैब में आते हैं तो इस पर आपको 30 हजार रुपये टैक्स चुकाना होगा। मान लीजिए उतने ही पैसे को इनकम प्लस ऑर्बिट्राज फंड में निवेश करने पर आपको 1 लाख रुयये का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस होता है। तो इस 1 लाख रुपये पर आपको सिर्फ 12.5 फीसदी टैक्स चुकाना होगा, जो सिर्फ 12.5 हजार रुपये होगा। यह डेट फंड के 30 हजार रुपये के टैक्स से काफी कम है। अगर आपका कैपिटल गेंस लाख रुपये में है तो आपकी टैक्स सेविंग्स भी लाख रुपये की होगी।

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