यूनियन बजट पेश होने में दो हफ्ते से कम बचा है। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार इस बार भी टैक्सपेयर्स के लिए राहत का ऐलान कर सकती है। पिछले साल यूनियन बजट में सरकार ने टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी थी। सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर दी गई थी। इससे नौकरी करने वाले लोगों को तो सालाना 12.75 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं रह गई है।
30 फीसदी टैक्स स्लैब को बढ़ाने की जरूरत
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को इस बार स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाना चाहिए। 30 फीसदी टैक्स स्लैब को बढ़ाना चाहिए। कैपिटल गेंस के नियमों को भी और आसान बनाने की जरूरत है। टैक्स से जुड़े विवाद के मामलों में कमी लाने के लिए एमनेस्टी स्कीम का भी ऐलान होना चाहिए। इससे टैक्सपेयर्स का भरोसा बढ़ेगा। सरकार ने पिछले कुछ सालों में टैक्स के नियमों को आसान बनाने पर फोकस रखा है।
टैक्स के नियमों को आसान बनाने पर फोकस
King Stubb & Kasiva में पार्टनर विपिन उपाध्याय के मुताबिक, यूनियन बजट 2026 टैक्स के लिहाज से खास है, क्योंकि इस साल से इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू होने जा रहा है। उन्होंने कहा, "फोकस टैक्स के पुराने नियमों से नए नियमों पर आसानी से शिफ्ट होने पर होना चाहिए। नए इनकम टैक्स एक्ट की लैंग्वेज आसान बनाई गई है। ऐसे सैकड़ों प्रावधानों को हटाया गया है, जिनकी जरूरत नहीं थी और जो बहुत पुराने पड़ गए थे।"
स्टैंडर्ड डिडक्शन 1 लाख रुपये किया जा सकता है
उन्होंने कहा, "राहत के कुछ और उपाय करने की जरूरत है। स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाकर 1,00,000 रुपये किया जा सकता है। 30 फीसदी टैक्स स्लैब को बढ़ाया जा सकता है। मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को इनफ्लेशन से राहत देने के उपाय किए जा सकते हैं। सरकार को इनकम टैक्स की नई और पुरानी रीजीम को लेकर भी तस्वीर साफ करनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स के नए नियमों में कैपिटल गेंस टैक्स के नियम और आसान होने चाहिए।
टैक्स विवादों में कमी लाने के लिए एमनेस्टी स्कीम
उपाध्याय ने कहा कि टैक्स से जुड़े विवादों के हल के लिए एमनेस्टी स्कीम जरूरी है। यह स्कीम पहले शुरू की गई 'विवाद से विश्वास' और 'सबका विश्वास' जैसी पहल की तर्ज पर हो सकती हैं। ऐसी वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम से टैक्स विवादों में फंसे 1.5 लाख करोड़ रुपये रिलीज हो सकते हैं। देश में टैक्स विवाद के करीब 38,000 मामले हैं।