Income Tax Changes: यूनियन बजट 2026-27 से इनकम टैक्स को लेकर सैलरीड और मिडिल क्लास की उम्मीदें काफी ऊंची थीं। लोग टैक्स स्लैब में बदलाव, स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने या नए टैक्स सिस्टम में अतिरिक्त राहत की उम्मीद कर रहे थे।
Income Tax Changes: यूनियन बजट 2026-27 से इनकम टैक्स को लेकर सैलरीड और मिडिल क्लास की उम्मीदें काफी ऊंची थीं। लोग टैक्स स्लैब में बदलाव, स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने या नए टैक्स सिस्टम में अतिरिक्त राहत की उम्मीद कर रहे थे।
लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स रेट छेड़ने के बजाय पूरे इनकम टैक्स सिस्टम को सुधारने का रास्ता चुना। सरकार का फोकस कानून को सरल बनाने, ITR फाइलिंग आसान करने, कंप्लायंस घटाने और लंबे समय से चल रहे टैक्स विवादों को कम करने पर रहा।
Income Tax Act, 2025: 60 साल पुराने कानून की विदाई
बजट 2026 का सबसे बड़ा ऐलान नया Income Tax Act, 2025 है, जो 1 अप्रैल से लागू होगा और 1961 के छह दशक पुराने कानून की जगह लेगा। सरकार ने साफ किया है कि यह कानून रेवेन्यू न्यूट्रल रहेगा, यानी टैक्स रेट में कोई बदलाव नहीं होगा।
नए कानून में सेक्शन और भाषा करीब 50% तक कम की जाएगी, अस्पष्ट नियम हटाए जाएंगे और टैक्स विवादों को कम करने की कोशिश की जाएगी। साथ ही, आम टैक्सपेयर्स के लिए ITR फॉर्म्स को नए सिरे से डिजाइन किया जाएगा, ताकि फाइलिंग प्रक्रिया आसान हो सके।
गलती और जानबूझकर टैक्स चोरी में फर्क
बजट में अंडर-रिपोर्टिंग और मिस-रिपोर्टिंग के बीच साफ अंतर किया गया है। अगर इनकम कम दिखाना गलती, चूक या अनजाने में हुआ है, तो पेनल्टी टैक्स की रकम का 50% होगी।
लेकिन अगर गलत जानकारी जानबूझकर दी गई है या इनकम छुपाई गई है, तो पेनल्टी बढ़कर टैक्स की रकम का 200% तक हो सकती है। सरकार का मकसद ईमानदार टैक्सपेयर्स को राहत देना और जानबूझकर टैक्स चोरी पर सख्ती करना है।
आसान ITR फॉर्म और समझने के लिए समय
वित्त मंत्री ने कहा है कि नए इनकम टैक्स नियमों के साथ नए और सरल ITR फॉर्म जल्द जारी किए जाएंगे। इन फॉर्म्स को आम टैक्सपेयर्स के हिसाब से डिजाइन किया जाएगा और बदलावों को समझने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा। यह कदम पहली बार ITR भरने वालों और छोटे टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
रिवाइज्ड ITR के लिए ज्यादा वक्त
सरकार ने रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। पहले यह आखिरी तारीख 31 दिसंबर थी, जिसे अब बढ़ाकर 31 मार्च किया जाएगा, वह भी नाममात्र फीस के साथ। इससे टैक्सपेयर्स को गलती सुधारने और छूटी हुई इनकम दिखाने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।
लेट ITR पर भी TDS रिफंड की राहत
एक अहम राहत के तौर पर अब टैक्सपेयर्स देर से ITR फाइल करने पर भी TDS रिफंड क्लेम कर सकेंगे। सिर्फ रिफंड लेने के लिए लेट फाइलिंग पर पेनल्टी नहीं लगेगी। यह खासतौर पर सैलरीड कर्मचारियों के लिए राहत भरा कदम है, जिनका ज्यादा TDS कट जाता है और समय पर रिटर्न फाइल नहीं हो पाता।
अपील के दौरान पेनल्टी पर ब्याज नहीं
अगर किसी टैक्स मामले में पेनल्टी लगी है और मामला पहली अपीलेट अथॉरिटी के पास लंबित है, तो उस अवधि में पेनल्टी की रकम पर ब्याज नहीं लिया जाएगा। फैसला चाहे किसी भी पक्ष में आए, इससे लंबे टैक्स विवादों के दौरान टैक्सपेयर्स पर फाइनेंशियल दबाव कम होगा।
फॉरेन एसेट्स के लिए 6 महीने की खास विंडो
बजट में छोटे टैक्सपेयर्स के लिए 6 महीने की फॉरेन एसेट डिस्क्लोजर स्कीम का ऐलान किया गया है। यह छात्रों, टेक प्रोफेशनल्स और विदेश से लौटे लोगों के लिए खास राहत मानी जा रही है, ताकि वे पुरानी गैर-जानबूझकर हुई गलतियों को बिना सख्त कार्रवाई के सुधार सकें।
MAT में राहत और रेट में कटौती
मिनिमम अल्टरनेट टैक्स यानी MAT को लेकर भी बजट में राहत दी गई है। प्रेज़म्पटिव टैक्स देने वाले नॉन-रेजिडेंट्स को MAT से छूट दी जाएगी, MAT को फाइनल टैक्स माना जाएगा और इसकी दर 15% से घटाकर 14% करने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे बिजनेस और विदेशी टैक्सपेयर्स के लिए अनिश्चितता कम होने की उम्मीद है।
छोटे लेकिन असरदार टैक्स बदलाव
बजट में कई छोटे लेकिन अहम टैक्स राहत कदम भी शामिल हैं। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के अवॉर्ड्स को टैक्स फ्री किया गया है। LRS के तहत एजुकेशन और मेडिकल खर्च पर TCS को 5% से घटाकर 2% किया गया है। इसके अलावा, विदेश टूर पैकेज पर TCS भी घटाकर 2% कर दिया गया है।
निवेशकों और ट्रेडर्स पर सख्ती
कुछ बदलाव ऐसे भी हैं, जो निवेशकों और ट्रेडर्स को सीधे प्रभावित करेंगे। फ्यूचर्स पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर STT 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। साथ ही, शेयर बायबैक से मिलने वाली रकम अब सभी शेयरधारकों के लिए कैपिटल गेन के तौर पर टैक्स की जाएगी।
टैक्स रेट नहीं बदले, सिस्टम बदला
कुल मिलाकर बजट 2026-27 में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ, लेकिन टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की बड़ी कोशिश जरूर की गई है। सरकार का जोर आसान कानून, सरल फाइलिंग, कम विवाद और टैक्सपेयर्स को ज्यादा समय देने पर है। भले ही टैक्स रेट में सीधी राहत नहीं मिली, लेकिन ये बदलाव लंबे समय में टैक्सपेयर्स के लिए सिस्टम को ज्यादा भरोसेमंद बना सकते हैं।
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