Income Tax Return की Online Filing के लिए फॉर्म 1 और 4 जारी किए गए

ITR 1 का इस्तेमाल इंडिविजुअल्स करते हैं। इसमें नौकरी करने वाले लोग और सीनियर सिटीजंस आते हैं। ITR 2 का इस्तेमाल ऐसे बिजनेसेज और प्रोफेशनल करते हैं, जिन्होंने प्रिज्म्प्टिव टैक्सेशन का चुनाव किया है

अपडेटेड May 23, 2023 पर 5:17 PM
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ITR 4 का इस्तेमाल रेजिडेंट इंडिविजुअल, HUF और ऐसी कंपनियां (LLP को छोड़कर) करती हैं, जिनकी टोटल इनकम 50 लाख रुपये तक होती है।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म 1 और 4 को एक्टिवेट कर दिया है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए इंडिविजुअल, प्रोफेशनल और स्मॉल बिजनेसेज इन फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। इनका इस्तेमाल फाइनेंशियल ईयर 2023-24 के इनकम टैक्स रिटर्न को फाइल करने के लिए किया जा सकता है। इस बारे में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एक ट्वीट किया है। इसमें कहा गया है कि दूसरे आईटीआर फॉर्म्स को तैयार करने के लिए सॉफ्टवेयर/यूटिलिटीज जल्द इनेबल कर दिए जाएंगे।

ITR फाइलिंग की अंतिम तारीख

एक इनकम टैक्सपेयर के ट्वीट के जवाब में डिपार्टमेंट ने कहा है कि एसेसमेंट ईयर 2023-24 में ऑनलाइन आईटीआर फाइलिंग के लिए आईटीआर 1 और 4 e-filing portal पर इनबेल कर दिए गए हैं। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए ITR फाइलिंग की आखिरी तारीख 31 जुलाई है। यह उन टैक्सपेयर्स के लिए है, जिनके अकाउंट की ऑडिटिंग जरूरी नहीं है।


ITR फॉर्म 1 का इस्तेमाल

ITR 1 का इस्तेमाल इंडिविजुअल्स करते हैं। इसमें नौकरी करने वाले लोग और सीनियर सिटीजंस आते हैं। ITR 2 का इस्तेमाल ऐसे बिजनेसेज और प्रोफेशनल करते हैं, जिन्होंने प्रिज्म्प्टिव टैक्सेशन का चुनाव किया है। इसके अलावा ऐसे इंडिविजुअल भी इस फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं, जिनकी सालाना इनकम 50 लाख रुपये से ज्यादा नहीं है।

ITR फॉर्म 4 का इस्तेमाल

ITR 4 का इस्तेमाल रेजिडेंट इंडिविजुअल, HUF और ऐसी कंपनियां (LLP को छोड़कर) करती हैं, जिनकी टोटल इनकम 50 लाख रुपये तक होती है। इसके अलावा ऐसे प्रोफेशन से जुड़े लोग भी इसका इस्तेमाल करते हैं जिनकी इनकम का कंप्यूटेशन सेक्शन 44एडी, 44एडीए या 44एई के तहत होता है। 5,000 रुपये की एग्रीकल्चर इनकम वाले लोग भी इस फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। इससे पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ITR की ऑफलाइन फाइलिंग को इनेबल किया था। इसके लिए उसने ITR 1, 2 और 4 के लिए एक्सेल यूटिलिटीज उपलब्ध कराया था।

ऑनलाइन-ऑफलाइन फाइलिंग में अंतर

डेलॉयट हैस्किन एंड सेल्स एलएलपी की राधिका विश्वनाथन ने कहा कि ऑनलाइन और ऑफलाइन में से किसी एक का सेलेक्शन टैक्सपेयर्स की स्थिति और कुछ दूसरे फैक्टर पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि अगर पहले से पूरी डिटेल उपलब्ध है तो ऑनलाइन मोड में फाइलिंग जल्द हो जाती है। इसमें टैक्सपेयर सीधे टैक्स फाइलिंग पोर्टल का इस्तेमाल करता है।

पेपर रिटर्न किसके लिए हैं?

ऑफलाइन यूटिलिटी उन लोगों के लिए अच्छी है, जिन्हें कई तरह की इफॉर्मेशन का ध्यान रखना पड़ता है और जिनका टाइम पीरियड भी अलग-अलग होता है। इसमें टैक्सपेयर के पास जब डिटेल उपलब्ध होता है वह इंफॉर्मेशन ऐड कर सकता है। विश्वनाथन ने कहा कि पेपर रिटर्न कुछ खास तरह के टैक्सपेयर्स के लिए हैं। इनमें सुपर सीनियर सिटीजंस शामिल हैं, जिनकी कोई बिजनेस इनकम नहीं है।

दोनों मोड में वेरिफिकेशन जरूरी

ऑफलाइन मेथड में टैक्सपेयर्स को संबंधित फॉर्म डाउनलोड करना पड़ता है। उसके बाद उसे भरना पड़ता है। उसके बाद इसे डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर अपलोड करना पड़ता है। इसके उलट ऑलाइन मोड में टैक् सपेयर्स सीधे डिपार्टमेंट के टैक्स पोर्टल का इस्तेमाल करते है। फॉर्म भरने के बाद वह उसे पोर्टल पर ही सब्मिट कर देता है। दोनों ही मोड में फॉर्म का वेरिफिकेशन जरूरी है।

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