Income Tax Return: इन 5 वजहों से आपको आ सकता है इनकम टैक्स नोटिस, इन बातों का रखें खास ख्याल

31 जुलाई तक आईटीआर फाइल करना जरूरी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिटर्न फाइल करने के लिए टैक्सपेयर्स को डेडलाइन का इंतजार नहीं करना चाहिए। इसकी वजह यह है कि जल्दबाजी में रिटर्न फाइल करने में गलती होने की संभावना ज्यादा होती है। गलती होने पर इनकम टैक्स नोटिस आ सकता है

अपडेटेड May 22, 2026 पर 7:49 AM
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इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब रिटर्न की जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है।

इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की डेडलाइन नजदीक आ रही है। 31 जुलाई तक आईटीआर फाइल करना जरूरी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिटर्न फाइल करने के लिए टैक्सपेयर्स को डेडलाइन का इंतजार नहीं करना चाहिए। इसकी वजह यह है कि जल्दबाजी में रिटर्न फाइल करने में गलती होने की संभावना ज्यादा होती है। गलत रिटर्न फाइल करने या रिटर्न में गलत इनकम बताने या किसी इनकम की जानकारी नहीं देने पर बाद में मुश्किल आ सकती है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आईटीआर फाइल करने में सावधानी जरूरी है। टैक्सपेयर्स को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब रिटर्न की जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है। इससे रिटर्न में छोटी गलती भी पकड़ में आने की संभावना बढ़ गई है। जांच में रिटर्न में अगर बड़ी गड़बड़ मिलती है तो टैक्सपेयर्स को बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 5 सामान्य गलती पर भी इनकम टैक्स का नोटिस आ सकता है।

1. इनकम की गलत जानकारी

इनकम टैक्स फॉर्म फाइल करने से पहले टैक्सपेयर्स को अपनी इनकम का ठीक तरह से कैलकुलेशन कर लेना जरूरी है। इसके लिए टैक्सपेयर्स फॉर्म 16, एआईएस जैसे डॉक्युमेट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर टैक्सपेयर्स को कैपिटल गेंस हुआ है तो उसके बारे में आईटीआर में बताना जरूरी है। बैंक में जमा पैसे पर मिलने वाले इंटरेस्ट के बारे में भी आईटीआर फॉर्म में बताना जरूरी है। अगर रिटर्न की जांच में आपने जो इनकम बताई है, वह डॉक्युमेंट्स से मैच नहीं करती है तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट नोटिस भेज सकता है।


2. गलत डिडक्शन क्लेम

कई टैक्सपेयर्स टैक्स बचाने के लिए डिडक्शंस क्लेम करते हैं। इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम में कई तरह के डिडक्शंस की इजाजत है। इससे टैक्स लायबिलिटी घट जाती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्स बचाने के लिए गलत डिडक्शंस क्लेम करना आपको मुश्किल में डाल सकता है। टैक्सपेयर्स को सिर्फ ऐसे डिडक्शंस क्लेम करना चाहिए, जिसका वह हकदार है। उसके पास डिडक्शंस से जुड़ा सबूत यानी डॉक्युमेंट्स भी होना चाहिए।

3. एचआरए का गलत फायदा

एचआरए क्लेम पर टैक्स का बोझ काफी कम हो जाता है। कई टैक्सपेयर्स एचआरए क्लेम करते हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एचआरए क्लेम करने के लिए कुछ नियम बनाए हैं। एचआरए क्लेम करने के लिए मकानमालिक का पैन, उसका पता आदि देना जरूरी होता है। साथ ही किराए की पर्ची भी जरूरी है। अगर कोई टैक्सपेयर्स एचआरए क्लेम करने के लिए फर्जी डॉक्युमेट्स का इस्तेमाल करता है तो उसे इनकम टैक्स का नोटिस आ सकता है।

4. टीडीएस अमाउंट मिसमैच

टीडीएस अमाउंट में मिसमैच से भी इनकम टैक्स का नोटिस आ सकता है। कई बार एंप्लॉयर टीडीएस काटता है लेकिन समय पर रिटर्न नहीं फाइल करता है या गलत रिटर्न फाइल करता है। ऐसा होने पर एंप्लॉयी को इनकम टैक्स का नोटिस आ सकता है। इसलिए फॉर्म 16 में काटे गए टीडीएस अमाउंट की जांच करना जरूरी है। अगर आपको कोई गलती दिखती है तो आप एंप्लॉयर से उसे ठीक करने के लिए कह सकते हैं। फॉर्म 16 में टीडीएस जमा करने का भी ब्योरा होता है।

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5 हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन की जानकारी

अगर कोई टैक्सपेयर्स वित्त वर्ष के दौरान हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन करता है तो उसकी जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न में देना जरूरी है। जैसे-अगर किसी एक वित्त वर्ष में आप बैंक में 10 लाख रुपये या इससे ज्यादा का कैश डिपॉजिट करते हैं तो इसके बारे में रिटर्न में बताना जरूरी है। क्रेडिट कार्ड से 2 लाख रुपये से ज्यादा की खरीदारी की जानकारी रिटर्न में देना जरूरी है। म्यूचुअल फंड्स में 2 लाख या इससे ज्यादा निवेश की जानकारी भी देनी जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर इनकम टैक्स का नोटिस आ सकता है।

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