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Income Tax: क्या आपको भी आया SMS या ईमेल? हो जाएं अलर्ट, इनकम टैक्स विभाग ने कही ये बात

Income Tax Alert: हाल के दिनों में देश के लाखों टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से ईमेल या मोबाइल मैसेज मिला है। इसमें बैंक खाते में बड़ी रकम जमा होने, प्रॉपर्टी की सेल-परचेज, शेयर या म्यूचुअल फंड निवेश और अन्य हाई-वैल्यू खर्चों का जिक्र है। ऐसे मैसेज देखकर कई लोग घबरा गए और उन्हें लगा कि कहीं यह कोई फर्जी नोटिस या स्कैम तो नहीं

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 20, 2025 पर 1:12 PM
Income Tax: क्या आपको भी आया SMS या ईमेल? हो जाएं अलर्ट, इनकम टैक्स विभाग ने कही ये बात
Income Tax Alert: हाल के दिनों में देश के लाखों टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से ईमेल या मोबाइल मैसेज मिला है।

Income Tax Alert: हाल के दिनों में देश के लाखों टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से ईमेल या मोबाइल मैसेज मिला है। इसमें बैंक खाते में बड़ी रकम जमा होने, प्रॉपर्टी की सेल-परचेज, शेयर या म्यूचुअल फंड निवेश और अन्य हाई-वैल्यू खर्चों का जिक्र है। ऐसे मैसेज देखकर कई लोग घबरा गए और उन्हें लगा कि कहीं यह कोई फर्जी नोटिस या स्कैम तो नहीं। अब इनकम टैक्स विभाग ने साफ कर दिया है कि यह मैसेज पूरी तरह असली और आधिकारिक है।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने साफ कहा है कि यह एडवाइजरी सभी टैक्सपेयर्स को नहीं भेजी गई है। यह केवल उन्हीं लोगों को भेजी गई है, जिनके इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में दी गई जानकारी और विभाग के पास मौजूद डेटा में बड़ा और साफ अंतर नजर आया है। विभाग के मुताबिक, यह जानकारी बैंकों, म्यूचुअल फंड हाउस, रजिस्ट्रार और अन्य रिपोर्टिंग संस्थाओं से मिलती है। जब ITR और इस डेटा में मिसमैच होता है, तभी टैक्सपेयर को अलर्ट किया जाता है।

इनकम टैक्स विभाग ने X (पूर्व में ट्विटर) पर बताया कि इस तरह के मैसेज का मकसद टैक्सपेयर्स को डराना नहीं है। यह एक सहायता और चेतावनी वाला कदम है, ताकि लोग समय रहते अपनी जानकारी की जांच कर सकें। विभाग चाहता है कि टैक्सपेयर खुद अपनी गलती सुधार लें, ताकि आगे चलकर नोटिस, पेनल्टी या कानूनी कार्रवाई की जरूरत न पड़े।

इस पूरे सिस्टम में AIS यानी Annual Information Statement की अहम भूमिका है। AIS में आपकी सालभर की फाइनेंशियल एक्टिविटी की जानकारी होती है, जैसे बैंक ट्रांजैक्शन, निवेश और बड़े खर्च। अगर किसी टैक्सपेयर ने अपनी ITR में कोई इनकम या ट्रांजैक्शन सही से नहीं दिखाया है, तो वही अंतर AIS में सामने आता है। इसी आधार पर कंप्लायंस पोर्टल के जरिए टैक्सपेयर को फीडबैक देने या रिटर्न सुधारने का मौका दिया जा रहा है।

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