इनकम टैक्स के नए कानून बना रही है सरकार, आप ऐसे ऑनलाइन भेज सकते हैं अपने सुझाव

सरकार इनकम टैक्स के नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसका मकसद मौजूदा कानूनी फ्रेमवर्क को चुस्त, स्पष्ट और समझने के लिहाज से आसान बनाना है। इससे टैक्स से जुड़े विवाद के मामलों में कमी आएगी। अदालतों में टैक्स के कम मामले पहुंचेंगे। साथ ही टैक्सपेयर्स नियमों को लेकर निश्चिंत महसूस करेंगे

अपडेटेड Oct 10, 2024 पर 4:45 PM
Story continues below Advertisement
इनकम टैक्स के नए नियमों के बारे में सुझाव इनकम टैक्स के पोर्टल पर दिए जा सकते हैं।

फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने जुलाई में यूनियन बजट पेश करने के दौरान कहा था कि सरकार इनकम टैक्स से जुड़े कानूनों को बदलने पर काम कर रही है। इसका मकसद मौजूदा कानूनी फ्रेमवर्क को चुस्त, स्पष्ट और समझने के लिहाज से आसान बनाना है। इससे टैक्स से जुड़े विवाद के मामलों में कमी आएगी। अदालतों में टैक्स के कम मामले पहुंचेंगे। साथ ही टैक्सपेयर्स नियमों को लेकर निश्चिंत महसूस करेंगे।

सीबीडीटी ने जारी की है प्रेस रिलीज

इस मकसद को ध्यान में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने एक प्रेस रिलीज जारी की है। इसमें टैक्सपेयर्स सहित सभी पक्षों से निम्नलिखित मसलों पर राय देने को कहा गया है:


1. आसान लैंग्वेज

2. मुकदमों में कमी

3. फॉर्म और रिटर्न फाइलिंग जैसे कंप्लायंस में कमी

4. बेकार/गैरजरूरी प्रावधानों को खात्मा

ऐसे दे सकते हैं अपने सुझाव

कोई व्यक्ति उपर्युक्त मसलों के बारे में अपनी राय दे सकता है। उसे अपनी सलाह में संबंधित सेक्शन, सब-सेक्शन, क्लॉज, नियम और फॉर्म नंबर देना होगा। यह सलाह इनकम टैक्स के पोर्टल पर दी जा सकती है। उसका लिंक है https://eportal.incometax.gov.in/iec/foservices/#/pre-login/ita-comprehensive-review

टैक्स रिफॉर्म्स की दिशा में बड़ा कदम

टैक्स रिफॉर्म की दिशा में यह काफी बड़ा कदम है। इसलिए नए कानून बनाने की प्रक्रिया में लोगों की राय काफी मायने रखती है। इससे टैक्स प्रोफेशनल्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, वकील और कंसल्टेंट्स को प्रस्तावित बदलावों और उनके लागू होने से पहले उनके असर को समझने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इसे एक उदाहरण की मदद से समझ जा सकता है। यह उदाहरण गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) को 2017 में लागू करने से जुड़ा है।

जीएसटी के क्रियान्वयन से सबक लेने की जरूरत

GST को वैट एक्ट, सेंट्रल एक्साइज और सर्विस टैक्स के कानूनों की जगह लागू किया गया था। लेकिन, लागू होने के बाद से इसमें कई बार संशोधन और बदलाव किए जा चुके हैं। इससे बिजनेसेज को एक तरफ कंप्लायंस में दिक्कतों का सामना करना पड़ा है तो दूसरी तरफ नियमों को लेकर स्पष्टता का अभाव रहा है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए इनकम टैक्स के नए नियमों को बनाने में लोगों की राय काम आएगी।

प्रोफेशनल्स के सुझावों पर अमल करने से फायदा

इनकम टैक्स एक्ट के फाइनल ड्राफ्ट की करीबी जांच होनी चाहिए। सभी पक्षों खासकर इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) और टैक्स प्रोफेशनल्स के एसोसिएशंस की सलाह पर गौर किया जाना चाहिए। इसके बाद ही इनकम टैक्स के नए कानून मजबूत और प्रासंगिक होंगे। साथ ही उन्हें लागू करने में दिक्कत नहीं आएगी। उनमें बार-बार बदलाव करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।

(लेखक सीए हैं। वह पर्सनल फाइनेंस खासकर इनकम टैक्स से जुड़े मामलों के एक्सपर्ट हैं)

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।