बजट में नई टैक्स रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने के लिए कई ऐलान, क्या सैलरीड टैक्सपेयर्स को रीजीम बदलने का मिलेगा मौका?

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई को पेश यूनियन बजट में इनकम टैक्स की नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने के लिए कई ऐलान किए। इससे टैक्सपेयर्स खासकर सैलरीड टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी नई रीजीम के इस्तेमाल में बढ़ सकती है। इस साल 31 जुलाई तक फाइल किए गए 73 फीसदी रिटर्न में नई रीजीम का इस्तेमाल किया गया

अपडेटेड Aug 09, 2024 पर 3:41 PM
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नई रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है। ओल्ड रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन नहीं बढ़ाया गया है।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स की नई रीजीम के लिए यूनियन बजट में कई ऐलान किए। पुरानी रीजीम के टैक्स के नियमों में उन्होंने बदलाव नहीं किया। इससे नई रीजीम अब काफी अट्रैक्टिव हो गई है। खासकर यह सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए अट्रैक्टिव हो गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह स्टैंडर्ड डिडक्शन है। नई रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है। ओल्ड रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन नहीं बढ़ाया गया है। सरकार ने नई रीजीम में एनपीसी का लाभ भी बढ़ाया है। अब एंप्लॉयी के एनपीएस अकाउंट में एंप्लॉयर के 14 फीसदी तक के कंट्रिब्यूशन पर डिडक्शन मिलेगा।

नई रीजीम में सैलरीड टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी बढ़ सकती है

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बजट में किए गए बदलाव के बाद टैक्सपेयर्स खासकर सैलरीड टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी नई रीजीम (New Regime) में बढ़ सकती है। सरकार ने पिछले साल के बजट में भी नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने के लिए कई ऐलान किए थे। उनका असर भी देखने को मिला है। FY24 का इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) फाइल करने में नई रीजीम का ज्यादा इस्तेमाल हुआ। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, 31 जुलाई तक कुल 7.28 करोड़ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किए गए। इनमें से 72 फीसदी टैक्सपेयर्स ने इनकम टैक्स की नई रीजीम का इस्तेमाल किया। इसका मतलब है कि जुलाई में नई रीजीम के लिए जो ऐलान किए गए हैं, उससे इसमें टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी और बढ़ सकती है।

क्या सैलरीड टैक्सपेयर्स को टैक्स रीजीम बदलने का मौका मिलेगा?


नई रीजीम के नियमों में बदलाव का ऐलान जुलाई में किया गया है। इस तरह इस वित्त वर्ष में करीब 4 महीने बीत चुके हैं। इससे अगर किसी सैलरीड टैक्सपेयर्स ने पुरानी रीजीम को सेलेक्ट किया है और वह अब नई रीजीम का इस्तेमाल करना चाहता है को क्या उससे टैक्स रीजीम में बदलाव करने का मौका मिलेगा? यह सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि एंप्लॉयर्स (कंपनियां) वित्त वर्ष की शुरुआत यानी अप्रैल में ही अपने एंप्लॉयीज को यह बताने के लिए कहती हैं कि वे नई और पुरानी रीजीम में से किसका इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसके बाद कंपनियां एंप्लॉयीज की सैलरी से चुनी गई रीजीम के आधार पर टीडीएस काटती है।

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बड़ी संख्या में सैलरीड टैक्सपेयर्स ओल्ड की जगह नई रीजीम का कर सकते हैं इस्तेमाल

एक्सपर्ट्स का कहना है कि चूंकि सरकार ने इस बार जुलाई में पेश यूनियन बजट में नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने का ऐलान किया है, जिससे सैलरीड टैक्सपेयर्स जिन्होंने ओल्ड रीजीम को सेलेक्ट किया था वे चाहकर भी नई रीजीम का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। इसलिए सरकार को सैलरीड टैक्सपेयर्स को टैक्स रीजीम में बदलाव करने का एक मौका देना चाहिए। एंप्लॉयर एक बार फिर अपने एंप्लॉयीज को नई और पुरानी रीजीम में से किसी एक का चुनाव करने का ऑप्शन दे सकते हैं। इससे बड़ी संख्या में सैलरीड टैक्सपेयर्स को फायदा होगा।

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