अब आपको अपना क्रेडिट स्कोर अपडेट होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अगले साल 1 जनवरी से बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस क्रेडिट स्कोर को जल्द-जल्द अपडेट करेंगे। आरबीआई ने इस बारे में ऐलान किया है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने 8 अगस्त को कहा कि क्रेडिट डेटा हर 15 दिन पर अपडेट होना चाहिए। इसे हर महीने की 15 तारीख या अंतिम तारीख को अपडेट किया जा सकता है या क्रेडिट इंस्टीट्यूशंस (सीआई) और क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियां (सीआईसी) इस बारे में किसी एक डेट को लेकर आपस में सहमत हो सकती हैं।
ग्राहक और बैंक दोनों को होगा फायदा
अभी क्रेडिट इंस्टीट्यूशंस (CI) को ग्राहक की क्रेडिट इंफॉर्मेशन (Credit Information) हर महीने सीआईसी को देना जरूरी होता है। डिजिटल लेंडिंग कंसल्टेंट पारिजात गर्ग ने कहा कि कर्ज लेने और देने दोनों के लिए ही सही क्रेडिट इंफॉर्मेशन जरूरी है। इसका जल्द अपडेट होना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि फ्रेश क्रेडिट इंफॉर्मेशन बैंक और एनबीएफसी के लिए काफी अहम है। क्रेडिट ब्यूरो Experian India के कंट्री मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष जैन ने कहा, "डेटा हर हफ्ते या हर 15 दिन पर अपडेट होना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर आज तीन-दिन, 7-दिन, 21-दिन लोन के जमाने में आप जो क्रेडिट स्कोर देखते हैं वह आपके फाइनेंशियल विहेबियर के बारे में सही जानकारी नहीं देता है।"
डायनेमिक क्रेडिट स्कोर से ग्राहक के बारे में मिलेगी सही जानकारी
ग्राहक को यह समझने की जरूरत है कि क्रेडिट स्कोर ऐसी कोई निश्चित संख्या नहीं है, जिसका कैलकुलेशन हर महीने, हर छह महीने या साल में एक बार होता है। इसमें लगातार बदलाव होता रहता है। जब आप अपनी क्रेडिट रिपोर्ट के लिए अप्लाई करते हैं तो इसका कैलकुलेशन तब उपलब्ध डेटा के आधार पर होता है। जैन ने कहा कि आपके क्रेडिट विहेबियर, लिए गए लोन, लोन के रीपेमेंट, लोन पर डिफॉल्ट आदि के हिसाब से आपका क्रेडिट स्कोर बदलता रहता है।
अभी EMI पर डिफॉल्ट की जानकारी शामिल होने में लंबा समय लगता है
आज अगर कोई व्यक्ति अपनी EMI पर डिफॉल्ट करता है तो यह आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में इसके दिखने में 60 दिन का समय लग सकता है। अगर लोन देने वाली कंपनियां या बैंक ग्राहक के क्रेडिट इंफॉर्मेशन के बारे में हर 15 दिन पर जानकारी देंगे तो यह क्रेडिट रिपोर्ट में 30-40 दिन में दिखने लगेगा। ऐसे में EMI पर डिफॉल्ट करने वाले ग्राहक के क्रेडिट स्कोर पर उसका असर जल्द दिखने लगेगा। जो ग्राहक समय पर अपना पेमेंट करते हैं उनका डेटा भी क्रेडिट रिपोर्ट में जल्द दिखने लगेगा। इससे उनके क्रेडिट स्कोर में इम्प्रूवमेंट की संभावना बढ़ जाएगी।
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नियम का पालन नहीं करने पर होगी कार्रवाई
क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों (CIC) को हर 31 मार्च और 30 सितंबर को आरबीआई को उन क्रेडिट इंस्टीट्यूशंस की लिस्ट भेजनी पड़ती है जो इस बारे में गाइडलाइन का पालन नहीं करती हैं। आरबीआई के नियमों के मुताबिक, अगर कोई सीआईसी या सीआई तय नियमों का प्लान नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।