इंडिया का पहला म्युनिसिपल बॉन्ड इश्यू रिटेल निवेशकों के लिए खुला, क्या आपको इनवेस्ट करना चाहिए?

म्युनिसिपल अथॉरिटी को पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बॉन्ड्स से पैसे जुटाने की इजाजत है। SEBI ने इसके लिए 2015 में गाइडलाइंस जारी की थी। हालांकि, अब तक सिर्फ संस्थागत निवेशकों के लिए ऐसे बॉन्ड इश्यू लाए गए हैे। पहली बार इंदौर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने रिटेल इनवेस्टर्स के लिए ऐसे बॉन्ड जारी किए हैं

अपडेटेड Feb 10, 2023 पर 1:41 PM
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बेंगलुरु एमसी ने 1997 में पहली बार म्युनिसिपल बॉन्ड्स जारी किए थे। उसके बाद 1998 में अहमदाबाद एमसी ने यह बॉन्ड जारी किए थे।

इंदौर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (IMC) ने म्युनिसिपल बॉन्ड्स का पब्लिक इश्यू पेश किया है। यह म्युनिसिपल बॉन्ड का इंडिया का पहला इश्यू है, जो रिटेल इनवेस्टर्स के लिए पेश किया गया है। यह इश्यू 244 करोड़ रुपये का है। इस पैसे का इस्तेमाल सोलर पावर प्रोजेक्ट के लिए होगा। इस इश्यू का बेस साइज 122 करोड़ रुपये है। कंपनी के पास अतिरिक्त 122 करोड़ रुपये का निवेश स्वीकार करने का विकल्प है। यह इश्यू 10-14 फरवरी के दौरान सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा। यह ग्रीन बॉन्ड इश्यू होगा, क्योंकि इस पैसे का इस्तेमाल 60 मेगावाट का कैपिटल सोलर फोटोवोल्टिक पावर प्लांट बनाने के लिए होगा। यह सोलर पावर प्लांट मध्य प्रदेश के खारगोन जिले के समराज और अशुखेड़ी गांव में बनेगा।

क्या है Muni बॉन्ड?

म्युनिसिपेलटीज को पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए बॉन्ड से पैसे जुटाने की इजाजत है। सड़क, वाटर सप्लाई और सेवरेज जैसे पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नगरपालिकाएं और नगर निगम पालिकाएं बॉन्ड से पैसे जुटा सकती हैं। इससे पहले भी Muni बॉन्ड इश्यू जारी किए जा चुके हैं। लेकिन इन्हें सिर्फ संस्थागत निवेशकों के लिए जारी किया गया था। बेंगलुरु एमसी ने 1997 में पहली बार म्युनिसिपल बॉन्ड्स जारी किए थे। उसके बाद 1998 में अहमदाबाद एमसी ने यह बॉन्ड जारी किए थे।

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2005 में जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूएल मिशन आने के बाद म्युनिसिपल बॉन्ड इश्यू आने बंद हो गए। फिर, 2015 में सेबी ने म्युनिसिपल बॉन्ड्स इश्यू की फिर से शुरुआत के लिए इसकी लिस्टिंग की गाइडलाइंस जारी की। इंदौर एमसी 2018 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने वाला पहला म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन था। गाजियाबाद 2021 में ग्रीन बॉन्ड इश्यू जारी करने वाला पहला म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन बन गया।

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Muni Bonds कितने अलग हैं?

केंद्र सरकार अपने फिस्कल डेफिसिट को पूरा करने के लिए गवर्नमेंट सिक्योरिटीज जारी करती है। इसे G-Sec कहा जाता है। इसी तरह राज्य सरकारें स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDL) जारी करती हैं। म्युनिसिपल बॉन्ड्स किसी शहर की तरफ से उसके इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जारी किए जाते हैं। जी-सेक और एसडीएल पर सॉवरेन गारंटी होती है। लेकिन Muni Bonds पर सॉवरेन गांरटी नहीं होती है। उसकी रेटिंग कॉर्पोरेशन की बैलेंसशीट और उसकी वित्तीय स्थिति पर निर्भर करती है।

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अगर इंटरेस्ट की बात करें तो इंडिया में बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड पिछले कुछ साल से 7.30-7.35 के बीच चल रही है। दूसरी तरफ लखनऊ एमसी के बॉन्ड का कूपन रेट 8.5 फीसदी है। इसे दिसंबर 2020 में जारी किया गया था। गाजियाबाद एमसी के बॉन्ड का कूपन रेट 8.1 फीसदी है। इंदौर के म्युनिसिपल बॉन्ड में कम से कम आपको 10,000 रुपये निवेश करने होंगे। इसमें मैच्योरिटी के तीन साल, पांच साल. 7 साल और 9 साल के विकल्प हैं।

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क्या आपको निवेश करना चाहिए?

अगर आप इंदौर एमसी के बॉन्ड इश्यू में अप्लाई करना चाहते हैं तो आपको ASBA प्रोसेस का इस्तेमाल करना होगा। इसमें आपके बैंक को बैंक अकाउंट से अप्लिकेशन मनी ब्लॉक करने का अधिकार मिल जाता है। अगर आपको बॉन्ड एलॉटमेंट के लिए सेलेक्ट किया जाता है तो यह पैसा आपके बैंक अकाउंट से निकल जाएगा। जीईपीएल कैपिटल के हेड (डेट मार्केट्स) दीपक पंजवानी ने कहा कि निवेशक इंदौर एमसी के बॉन्ड इश्यू में पैसे लगा सकते हैं। इंदौर को लगातार सबसे स्वच्छ शहर का सर्टिफिकेट मिलता आ रहा है। इस बॉन्ड पर छमाही पेमेंट की स्थिति में यील्ड 8.42 फीसदी है, जो अट्रैक्टिव है।

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