डिजिटल कॉपी की बजाय बीमा पॉलिसी दस्तावेजों की हार्ड कॉपी रखना पसंद करते हैं 82% पॉलिसीधारकः सर्वे

सर्वेक्षण में भाग लेने वाले 10 में से लगभग 8 लोग क्लेम या आपात स्थिति में पॉलिसी की एक हार्ड कॉपी रखना बेहतर समझते हैं

अपडेटेड Nov 18, 2021 पर 6:07 PM
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बॉम्बे मास्टर प्रिंटर्स एसोसिएशन (BMPA) के एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार भारत में महामारी के बाद बीमा करानेवाले लोगों की संख्या में इजाफा देखा गया है लेकिन साथ ही सर्वेक्षण में पाया गया कि 80% से अधिक बीमा खरीदार या पॉलिसीधारक अपने पॉलिसी दस्तावेज की एक हार्ड कॉपी पाना ज्यादा पसंद करते हैं।

हालांकि कुल पॉलिसी खरीदारों में से आधे से भी कम लोगों को कंपनियों की तरफ से हार्ड कॉपी प्राप्त हुई जिससे खरीदारों के बीच क्लेम को प्राप्त करने के बारे में अनिश्चितता बढ़ गई।

दरअसल बीमा पॉलिसी बीमा कंपनी और बीमित व्यक्ति के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट होता है जिससे लगभग 82% बीमा करानेवालों ने डिजिटल के मुकाबले इसकी हार्ड कॉपी को प्राप्त करने को प्राथमिकता दी। ये जानकारी विभिन्न आयु वर्गों और क्षेत्रों के लगभग 5,900 लोगों पर किये गये सर्वेक्षण आधार पर प्राप्त हुई है।


पॉलिसी प्रमाणपत्र में बीमा कवर के महत्वपूर्ण विवरण, लाभ, नियम और शर्तें, जरूरत पड़ने पर तो क्लेम फाइल करने की प्रक्रिया और बीमाकर्ता को संपर्क करने संबंधी जानकारी दी गई होती हैं।

सर्वेक्षण में भाग लेने वाले 10 में से लगभग आठ लोगों को लगता है कि क्लेम या आपात स्थिति के दौरान बीमा कंपनी द्वारा जारी पॉलिसी की एक हार्ड कॉपी बेहतर रहेगी।

मिंट में छपी खबर के मुताबिक इस सर्वे में प्रश्नों का उत्तर देने वालों में लगभग 56% लोग 18-40 वर्ष के आयु वर्ग के, 28% लोग 41-60 वर्ष के वर्ग के और 14% लोग 60 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के थे।

वहीं BMPA के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान मैनेजिंग कमेटी के सदस्य मेहुल देसाई ने कहा “पिछले एक साल में जीडीपी में बीमा के योगदान की वजह से तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। ऐसे में बीमा खरीदारों को उनके निवेश के बारे में सुरक्षित महसूस कराना भी जरूरी है। अभी भी क्लेम की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अधिकांश कंपनियां मूल दस्तावेज की हार्ड कॉपी मांगती हैं। अब इंश्योरेंस रेगुलेटर को धारा 4 फिर से बहाल करने पर विचार करना चाहिए और खरीदारों के हित में जल्द से जल्द पॉलिसी दस्तावेज की हार्ड कॉपी जारी करना अनिवार्य करना चाहिए।" मेहुल देसाई ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ मास्टर प्रिंटर्स (AIFMP) की गवर्निंग काउंसिल (GC) के सदस्य भी हैं।

कई बीमा कंपनियों ने कोरोना महामारी के पहले से ही बीमा पॉलिसियों की हार्ड कॉपी का पूरी तरह से त्याग करने या वैकल्पिक बनाकर 'गो ग्रीन' होने का फैसला किया है। वहीं कई लोगों का मानना ​​है कि गो ग्रीन के नाम पर हार्ड कॉपी देने से बचने वाली वही बीमा कंपनियां पॉलिसी की रकम का क्लेम करते वक्त उनसे एक हार्ड कॉपी मांगती हैं। ये कंपनियां बीमा पॉलिसी की हार्ड कॉपी के साथ-साथ अन्य आवश्यक दस्तावेज भी मांगती हैं।

सर्वेक्षण में शामिल लोगो में 60% से अधिक ने बताया कि बीमा कंपनियां हार्ड कॉपी की बजाय केवल डिजिटल कॉपी देने पर जोर देती हैं। इसके साथ ही 67% लोगों ने कहा कि वे सुरक्षा और ऐहतियात के तौर पर साइबर कैफे प्रिंटर, प्रिंटर शॉप या घर से पॉलिसी का प्रिंटआउट लेकर रखते हैं।

बता दें कि IRDAI (ई-बीमा पॉलिसी जारी करना) रेगुलेशन, 2016 के नियम 4 के अनुसार एक बीमाकर्ता को पॉलिसीधारकों को बीमा प्रमाणपत्र की हार्ड और इलेक्ट्रॉनिक दोनों प्रतियां जारी करनी होती है।

हालांकि कोविड -19 महामारी के कारण एक अंतरिम विकल्प के रूप में, IRDAI ने बीमा कंपनियों को केवल इलेक्ट्रॉनिक पॉलिसी दस्तावेज जारी करने की अनुमति दी थी और इसके बाद भी इस संबंध में कंपनियों को और दो एक्सटेंशन देते हुए 31 मार्च, 2022 तक बीमा पॉलिसियों की हार्ड कॉपी देने के संबंध में छूट प्रदान की थी।

वहीं सर्वेक्षण में भाग लेने वालों में से लगभग 73% का मानना ​​था कि खासकर जीवन और स्वास्थ्य बीमा के मामले में रिकॉर्ड के लिए दस्तावेज की एक हार्ड कॉपी रखना बेहतर था।

 

 

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