इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (Electric Vehicles) खरीदने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। सरकार भी ईवी (EV) को बढ़ावा दे रही है। इससे एक तरफ पेट्रोल-डीजल की डिमांड घटेगी तो दूसरी तरफ पॉलूशन में कमी आएगी। अगर आप भी इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो इसके इश्योरेंस के बारे में जरूरी बातें जान लीजिए।
इलेक्ट्रिक कार का इश्योरेंस कराने पर कितना खर्च आता है?
अभी 65 किलोवाट (KW) से ज्यादा क्षमता की इलेक्ट्रिक कार के थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस का प्रीमियम सालाना करीब 6,707 रुपये है। 30 से 65 केवी का प्रीमियम 2,738 रुपये आएगा। 30 केवी से कम की व्हीकल का प्रीमियम 1,761 रुपये आएगा। कंप्रिहेन्सिव पॉलिसी का प्रीमियम अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनी के लिए अलग-अलग होता है। यह मॉडल और एड-ऑन पर डिपेंड करता है।
अगर टू-व्हीलर की बात करें तो थर्ड पार्टी इश्योरेंस का सालाना प्रीमियम 3 केवी क्षमता तक के लिए 410 रुपये, 3 से 7 केवी के लिए 639 रुपये, 7 से 16 केवी के लिए 1,014 और 16 केवी से ज्यादा क्षमता के लिए 1,975 रुपये है।
क्या इलेक्ट्रिक व्हीकल का इश्योरेंस कराना महंगा है?
हां, पेट्रोल और डीजल के मुकाबले इलेक्ट्रिक व्हीकल का कम्प्रेहेन्सिव इश्योरेंस महंगा है। इसकी वजह यह है कि एडवॉन्स टेक्नोलॉजी की वजह से इसका रिपेयर कॉस्ट ज्यादा होती है। बैटरी रिप्लेसमेंट कॉस्ट भी ज्यादा होती है। सर्विसिंग कॉस्ट भी पेट्रोल-डीजल व्हीकल के मुकाबले ज्यादा होती है।
क्या इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के इंश्योरेंस प्रीमियम पर कोई डिस्काउंट मिलता है?
IRDAI ने इंश्योरेंस कंपनियों को इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम पर 15 फीसदी डिस्काउंट देने को कहा है।
इलेक्ट्रिक इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए आइडियल कवरेज क्या है?
चूंकि, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के पार्ट्स की कॉस्ट और सर्विस चार्ज ज्यादा होती है, जिससे आपको कम्प्रिहेन्सिव पॉलिसी खरीदने की सलाह दी जाती है।
एड-ऑन एडिशनल बेनेफिट्स हैं, जिन्हें इंश्योरेंस पॉलिसी में एड किया जा सकता है। इसके लिए आपको एक्स्ट्रा प्रीमियम चुकाना पड़ता है।
क्या इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए कम्प्रिहेन्सिव इंश्योरेंस पॉलिसी जरूरी है?
नहीं, कानून के मुताबिक ईवी के लिए कम्प्रिहेन्सिव इंश्योरेंस पॉलिसी अनिवार्य नहीं है। हालांकि, यह लेना फायदेमंद है, क्योंकि यह कई तरह की लाइबिलिटीज से प्रोटेक्शन देता है।