कैंसर के एक मरीज ने रेलिगेयर इंश्योरेंस कंपनी (Religare Insurance company) से 6.7 लाख रुपये का मुकदमा जीत लिया है। दरअसल, कंपनी ने मरीज को उपचार के लिए मेडिकल इंश्योरेंस से इनकार कर दिया था। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
कैंसर के एक मरीज ने रेलिगेयर इंश्योरेंस कंपनी (Religare Insurance company) से 6.7 लाख रुपये का मुकदमा जीत लिया है। दरअसल, कंपनी ने मरीज को उपचार के लिए मेडिकल इंश्योरेंस से इनकार कर दिया था। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने कैंसर के एक 60 वर्षीय मरीज को यह दलील देते हुए मेडिकल इंश्योरेंस (medical insurance) देने से इनकार कर दिया कि उसे पहले से डायबिटीज और हाइपरटेंशन की बीमारी थी, जिसका उसने पॉलिसी लेते समय खुलासा नहीं किया था।
आठ महीने तक चली कानूनी लड़ाई
एक कंज्यूमर कोर्ट में आठ महीने तक चली लड़ाई में, जजों ने निजी कंपनी को फटकार लगाई और कहा कि हाइपरटेंशन और डायबिटीज बीमारियां नहीं बल्कि सामान्य फिजिकल डिसॉर्डर्स हैं। ये बीमारियां मेडिकल इंश्योरेंस से इनकार का आधार नहीं हो सकती हैं।
कोर्ट ने समय पर प्रीमियम का भुगतान करने वाले बीमार मरीज की परवाह नहीं करने पर रेलिगेयर (Religare) को आड़े हाथों लिया।
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अब देना होगा मुआवजा
कोर्ट ने मरीज को इंश्योरेंस से देने से इनकार करने पर कंपनी को 12 फीसदी ब्याज दर के साथ 5 लाख रुपये, मानसिक उत्पीड़न के लिए 1.1 लाख रुपये अतिरिक्त और कोर्ट के खर्चों और नुकसान के एवज में 10,000 रुपये का भुगतान मरीज को करने का आदेश जारी किया।
2011 में खरीदा था फैमिली कवर
रिपोर्ट के मुताबिक, 60 वर्ष मरीज ने नवंबर, 2011 में रेलिगेयर से फैमिली कवर इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदी थी। मरीज को 2018 में कैंसर का पता चला, तो एचसीजी हॉस्पिटल में उसका उपचार शुरू हुआ। अस्पताल ने उन्हें 11 लाख रुपये का बिल थमाया। पॉलिसीहोल्डर ने तुरंत 5 लाख रुपये का इंश्योर्ड सम पाने के लिए रेलिगेयर से संपर्क किया। लेकिन इंश्योरेंस कंपनी ने यह तर्क देते हुए उसका क्लेम खारिज कर दिया कि उन्होंने हाइपरटेंशन और डायबिटीज जैसी बीमारियों का पहले खुलासा नहीं किया था।
जज ने की कंपनी की आलोचना
मरीज ने एक लीगल नोटिस भेजा और बेंगलुरु की एक कंज्यूमर कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया। कंज्यूमर फोरम के जजों ने कैंसर मरीज के प्रति कठोर व्यवहार पर कंपनी की आलोचना की और मरीज को मुआवजा देने का आदेश दिया।
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