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सरकार के इस प्रस्ताव से परेशान बीमा कंपनियां, इंडस्ट्री को ये हैं दिक्कतें

लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों ने सरकार के एक प्रस्ताव पर चिंता जाहिर की है। कंपनियों का कहना है कि अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो इससे वित्तीय नुकसान हो सकता है और इन नीतियों का गलत तरीके से इस्तेमाल भी हो सकता है। जानिए क्या है यह प्रस्ताव जिसे लेकर बीमा कंपनियां परेशान हैं?

Edited By: Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Feb 26, 2025 पर 9:35 PM
सरकार के इस प्रस्ताव से परेशान बीमा कंपनियां, इंडस्ट्री को ये हैं दिक्कतें
सरकार ने हाल ही में यह प्रस्ताव दिया था कि निजी बीमा कंपनियों के लिए फ्री-लुक पीरियड को 30 दिनों से बढ़ाकर एक साल किया जाए, ताकि नीतियों के गलत तरीके से बेचे जाने पर रोक लगाई जा सके।

लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों ने सरकार के उस प्रस्ताव पर चिंता जाहिर की है जिसमें प्राइवेट बीमा कंपनियों के लिए फ्री-लुक पीरियड (FLP) को 30 दिनों से बढ़ाकर 1 साल करने की बात कही गई है। कंपनियों का कहना है कि अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो इससे वित्तीय नुकसान हो सकता है और इन नीतियों का गलत तरीके से इस्तेमाल भी हो सकता है। अभी की बात करें तो एलआईसी (LIC) जैसी सरकारी जीवन बीमा कंपनी ऑफलाइन तरीके से खरीदी गई पॉलिसी पर 15 दिनों का और ऑनलाइन तरीके से खरीदी गई पॉलिसी पर 30 दिनों का फ्री-लुक पीरियड देती हैं।

क्या है Free-Look Period?

FLP एक ग्रेस पीरियड है, जिसके दौरान पॉलिसीहोल्डर्स को अगर बीमा पॉलिसी पसंद नहीं आती हैं तो उसे रद्द कराया जा सकता है। भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के निर्धारित नियमों के मुताबिक पॉलिसी रद्द करने पर पॉलिसीहोल्डर्स को स्टांप ड्यूटी और मेडिकल टेस्ट से जुड़े खर्चों को घटाकर बाकी पैसा वापस मिल जाता है। इससे पॉलिसीहोल्डर्स को अगर लगता है कि उन्हें गलत तरीके से पॉलिसी बेची गई है तो वे बिना सरेंडर शुल्क के अपनी पॉलिसी रद् करा सकते हैं।

इंडस्ट्री को सरकार के प्रस्ताव से क्यों है परेशानी?

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