Gold Prices: सोने की कीमतों में आई 45 साल की सबसे बड़ी उछाल, शेयर बाजार को भी दी मात

Gold Prices: एक तरफ जहां शेयर बाजार में चौतरफा गिरावट देखने को मिल रही है। वहीं अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतें इस साल अपने रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। यह पिछले 45 सालों में सोने में आई सबसे बड़ी उछाल है। इसके साथ ही, चांदी भी नए उच्च स्तर पर पहुंच गई है और पिछले इसमें पिछले चार सालों की सबसे बड़ी तेजी दर्ज की गई है

अपडेटेड Oct 23, 2024 पर 5:48 PM
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Gold Prices: अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों में इस साल अबतक 32.5% की बढ़ोतरी हुई है

Gold Prices: एक तरफ जहां शेयर बाजार में चौतरफा गिरावट देखने को मिल रही है। वहीं अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतें इस साल अपने रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। यह पिछले 45 सालों में सोने में आई सबसे बड़ी उछाल है। इसके साथ ही, चांदी भी नए उच्च स्तर पर पहुंच गई है और पिछले इसमें पिछले चार सालों की सबसे बड़ी तेजी दर्ज की गई है। मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद से सोने और चांदी की कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है।

अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों में इस साल अबतक 32.5% की बढ़ोतरी हुई है। यह 1979 के बाद किसी एक साल में सोने में सबसे अधिक उछाल है। वहीं दूसरी ओर चांदी का बाव 37.5% तक बढ़ा है। भारत में भी, MCX गोल्ड की कीमतों में 23.6% और MCX सिल्वर में इस साल 32.9% की बढ़ोतरी हुई है। यह साल 2020 के बाद से उनकी सबसे बड़ी बढ़त है।

सोने-चांदी की कीमतों में तेजी का क्या है कारण?

मिराए एसेट इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के फंड मैनेजर, सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने बताया कि मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ओर से ब्याज दर में कटौती, डॉलर इंडेक्स में स्थिरता और तमाम देशों के केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की भारी मात्रा में खरीदारी से कीमती धातुओं की मांग बढ़ी है। इसके अलावा, चीन की इकोनॉमी में सुधार की उम्मीदों और मजबूत इंडस्ट्रियल मांग से चांदी की कीमतो में भी जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।


एनालिस्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने सितंबर में ब्याज दरों में 0.50 फीसदी की कटौती की थी। कम ब्याज दरों के चलते बॉन्ड अब पहले से कम आकर्षक हो गया है, जिससे वहां से पूंजी निकलकर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं में आई है। दूसरी ओर सरकार ने गोल्ड और सिल्वर की कीमती धातुओं पर इंपोर्ट शुल्क में कटौती ने घरेलू खरीदारों के लिए सोने-चांदी को और आकर्षक बना दिया है।

चीन की सोने के भंडार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी से भी कीमतों में इजाफा हुआ है। साल 2024 में चीन ने अपने भंडार में 29 टन सोना जोड़ा, जो पिछले साल की तुलना में 16 फीसदी अधिक है। इसके साथ ही, अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से भी कीमती धातुओं की कीमतों को बढ़ावा मिला है, क्योंकि ये आमतौर पर इनका वैल्यूएशन डॉलर में ही होता है।

दूसरी ओर भारतीय शेयर बाजार में अक्टूबर की शुरुआत से ही भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रही हैं। सेंसेक्स और निफ्टी अपने हालिया शिखर से 5% से अधिक गिर चुके हैं, जबकि बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 6% से अधिक की गिरावट आई है।

अभी और बढ़ सकते हैं दाम

Choice Broking के कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट, आमिर मकड़ा का कहना है कि इस साल कीमती धातुओं में तेजी का ट्रेंड जारी रहने की संभावना है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों ममें एक और कटौती की उम्मीद ने सोने-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना को बढ़ाया है। त्योहारी सीजन में, खासकर गहनों के रूप में सोने की मांग बढ़ने की संभावना है, जिससे कीमतों और चढ़ सकती है।

वहीं सिद्धार्थ श्रीवास्तव का कहना है कि निवेशकों को सोने में मध्यम अवधि में लाभ की उम्मीद करनी चाहिए और वे डिप्स पर खरीदारी या सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश कर सकते हैं। वहीं, चांदी में और तेज उछाल की संभावनाएं हैं, लेकिन निवेशकों को इसके मूल्य में अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

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