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सोने का भारत पर क्या है नकारात्मक असर

सोने का देश की अर्थव्यवस्था के लिए ज्यादा अच्छा ना होने का एक बड़ा कारण है कि ये अनुत्पादक प्रकृति का है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 01, 2013 पर 5:44 PM
सोने का भारत पर क्या है नकारात्मक असर

दुनिया में सोने की खपत वाला भारत सबसे बड़ा देश है। भारत का सोने से लगाव बहुत बहुत पुराना है। दुनिया में सोने की खदानों का अमूमन 33 फीसदी या 700 टन सोना भारत में खपा लिया जाता है। ये भारत को दुनिया का सबसे बड़ा सोने का आयातक बनाता है।

अगर इतनी बड़ी मात्रा में खाने की चीजों का आयात होता तो भी ये बात समझने वाली हो सकती थी क्योंकि ये लोगों के पेट भरने के काम आता। लेकिन इतने सोने का क्या उपयोग है। हमारे पास शायद इसका कोई साफ जवाब नहीं होगा लेकिन परंपरागत रुप से हम लगातार सोना खरीदते आ रहे हैं।

आइये कुछ आधारभूत बातें जानते हैं। दुनिया में पैदा होने वाले सोने का अमूमन 52 फीसदी गहने बनाने में प्रयोग होता है। 12 फीसदी का उपयोग उद्योगों में होता है, 18 फीसदी निवेश होल्डिंग (गोल्ड ईटीएफ आदि) में उपयोग होता है और बचा हुआ 18 फीसदी सेंट्रल बैंकों के पास रखा हुआ है।

दुनिया की 52 फीसदी गहनों की खपत में से ज्यादातर खपत भारत में होती है। साधारणतया एक मध्यम वर्गीय व्यक्ति अपने पूरे जीवन में करीब 15-18 लाख रुपये के सोने के गहने खरीदता है।

भारतीय इतने गहने क्यों खरीदते हैं?

इसके पीछे का मूल कारण भारतीय पंरपराओँ में छुपा हुआ है और खासकर शादी में। हमारी परंपराओं में बहुत से बदलाव आए हैं लेकिन शादी विवाह के मौके पर सोना खरीदने की परंपरा में अभी भी बहुत बदलाव नहीं आया है। हालांकि नई पीढी को सोना पहनने का इतना शौक नहीं है फिर भी सोने की मांग में ज्यादा गिरावट नहीं आई है। हमारे देश में हर साल करीब 950 टन सोने की मांग देखी जाती है।

हम इस परंपरा को क्यों बरकरार रखना चाहते हैं?

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