दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों में मची गोल्ड खरीदने की होड़, क्या रिटेल इनवेस्टर्स को भी करना चाहिए ऐसा?

Gold buying : केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद के चलते सोने की डिमांड 11 साल के हाई पर पहुंच गई। आर्थिक मंदी की आशंका के चलते केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से अपनी फॉरेक्स बास्केट में विविधता लाने के लिए सोना खरीद रहे हैं। पिछले 10 महीने में भारत में कीमतों के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के साथ घरेलू सेल्स को झटका लगा है, जिससे कम डिमांड, भारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के संकेत मिल रहे हैं

अपडेटेड Feb 08, 2023 पर 6:07 PM
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Gold Buying : पिछले 10 महीने के दौरान गोल्ड डिस्काउंट (Gold discount) उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, क्योंकि कीमतों में उछाल के चलते घरेलू बिक्री को झटका लगा है

Central banks Gold buying : केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद 2022 में दूसरी बार नए रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई। इसके चलते सोने की डिमांड 11 साल के हाई पर पहुंच गई। दरअसल, आर्थिक मंदी की आशंका के चलते केंद्रीय बैंक हर साल सोना खरीद रहे हैं। केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से अपनी फॉरेक्स बास्केट (forex basket) में विविधता लाने के लिए सोना खरीद रहे हैं। पिछले 10 महीने में भारत में कीमतों के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के साथ घरेलू सेल्स को झटका लगा है, जिससे कम डिमांड, भारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के संकेत मिल रहे हैं।

इन वजहों से बढ़ी खरीद

महामारी की वापसी, दो यूरोपीय देशों के बीच जंग, लिक्विडिटी में कमी, भारी उतार-चढ़ाव, कमोडिटी की कीमतों में उछाल, करेंसी वार, महंगाई में बढ़ोतरी आदि के चलते 2022 में कई अर्थव्यवस्थाओं में मंदी के हालात बन गए थे।


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भले ही अनिश्चितता के दौर में इनवेस्टर्स सोने में निवेश करते रहे हैं, लेकिन चमकदार धातुओं के सेफ हैवन होने के साथ ही बॉन्ड यील्ड्स भी खासी आकर्षक थीं। दूसरी तरफ, केंद्रीय बैंकों पर भी इसी से प्रभावित दिख रहे थे।

भारत सहित दूसरे देशों ने भी बढ़ाई खरीद

किसी भी देश की करेंसी का मूल्यांकन, उसके विदेशी मुद्रा भंडार से किया जाता है। ज्यादातर देश लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स के चलति डॉलर को होल्ड करते हैं। 2022 में डॉलर की तुलना में भारतीय रुपया खासा कमजोर हुआ है। आरबीआई ने रुपये को नियंत्रित करने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल किया, साथ ही सोने में निवेश के साथ विविधता भी लाई है। चीन और रूस जैसे अन्य देशों ने भी यही काम किया। केंद्रीय बैंकों की खरीद के चलते 2022 में सोने की डिमांड 11 साल के हाई पर पहुंच गई और खरीद 18 फीसदी बढ़कर 4,741 टन रही। यह लगभग 2011 के बराबर रही।

पिछली बार केंद्रीय बैंकों ने 1967 में इतनी मात्रा में सोना खरीदा था, जब अमेरिकी डॉलर को भी मेटल का समर्थन हासिल था। केंद्रीय बैंकों ने अपने मुद्रा भंडार में विविधता लाने को प्राथमिकता दी या डॉलर खरीदे।

क्या करें खुदरा निवेशक

क्या खुदरा निवेशकों को भी केंद्रीय बैंकों की राह पर चलना चाहिए? नहीं, ऐसा जरूरी नहीं है। दरअसल, केंद्रीय बैंकों की खरीद से सोने की कीमतें इतनी ज्यादा हो गई है कि उस स्तर पर कंज्यूमर बहुत कम हैं।

पिछले 10 महीने के दौरान गोल्ड डिस्काउंट (Gold discount) उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, क्योंकि कीमतों में उछाल के चलते घरेलू बिक्री को झटका लगा है। रॉयटर्स के मुताबिक, डीलर्स आधिकारिक घरेलू कीमतों पर 42 डॉलर प्रति औंस तक डिस्काउंट की पेशकश कर रहे हैं, जबकि पिछले हफ्ते तक डिस्काउंट 24 डॉलर के स्तर पर था।

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बाजार में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) भी खरीदार नहीं हैं। 2022 में 110 टन की बिकवाली के साथ वे नेट सेलर रहे थे, जिसमें अमेरिका इस मामले में अग्रणी था।

सोने की कीमतें टिके रहने की एक वजह केंद्रीय बैंक की खरीद है। यह सोने की कीमतों से जुड़ी पहेली का सबसे जटिल हिस्सा है। केंद्रीय बैंकों से जुड़ी ज्यादातर खबरें देरी से आती हैं और यही वजह से डिमांड तय करना मुश्किल हो रहा है।

हालांकि, एक बात निश्चित है कि सोना विदेशी मुद्रा भंडारों का अभिन्न हिस्सा बन गया है। एक इनवेस्टर के लिए मौजूदा स्तरों पर सोना खरीदना जोखिम भरा हो सकता है। डिस्काउंट में कमी से वास्तविक खरीद के संकेत मिलते हैं, जो तेजी का एक अच्छा संकेत है।

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