इनवेस्टमेंट में अफरीदी नहीं, राहुल द्रविड़ जैसा परफॉर्मेंस आपको बनाएगा विनर

इनवेस्टमेंट की दुनिया भी क्रिकेट के खेल की तरह है। इसमें धैर्य, अनुशासन, ठोस प्लानिंग, जोखिम लेने की क्षमता बहुत मायने रखती है। इनवेस्टमेंट में शानदार कामयाबी के लिए आपको द्रविड़ जैसा खेलना होगा

अपडेटेड Jul 05, 2022 पर 6:00 PM
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अगर आपने म्यूचुअल फंड्स के जरिए शेयरों में निवेश किया है तो फिर आपको बाजार की गिरावट से घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

अगर आप क्रिकेट (Cricket) के शौकीन हैं तो आपने राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) को खेलते देखा होगा। आपने पाकिस्तान के मशहूर क्रिकेटर शाहिद अफरीदी (Shahid Afridi) की तूफानी बल्लेबाजी देखी होगी। क्या आपने दोनों प्लेयर्स की बैटिंग के तरीके पर गौर किया है?

द्रविड़ बल्लेबाजी में अनावश्यक जोखिम नहीं लेते थे। उनकी बल्लेबाजी में लचीलापन था। वह बॉलर को इज्जत देना जानते थे। वह पिच पर टिकने का हुनर जानते थे। नतीजा यह है कि वह देश में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में शामिल हैं। इंटरनेशनल क्रिकेट में उन्होंने 24,000 से ज्यादा रन बनाए हैं। साथ ही वह अपनी ठोस रणनीति, दृढ़ इच्छाशक्ति और धैर्य की बदौलत मैच जीतना जानते थे।

द्रविड़ के उलट शाहिद अफरीदी धुआंधार बैटिंग के लिए जाने जाते हैं। वह हर गेंद को खेलने की कोशिश करते थे। पिच जैसा भी हो उनका रुख आक्रामक रहता था। इनवेस्टमेंट की दुनिया भी क्रिकेट के खेल की तरह है। इसमें धैर्य, अनुशासन, ठोस प्लानिंग, जोखिम लेने की क्षमता बहुत मायने रखती है। इनवेस्टमेंट में शानदार कामयाबी के लिए आपको द्रविड़ जैसा खेलना होगा।


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मशहूर निवेशक वॉरेन बफे ने कहा था, 'इनवेस्टमेंट इज सिंपल, बट नॉट ईजी'। इसका मतलब यह है कि हम कई बार आसान रास्ते से भटक जाते हैं और मुश्किल रास्ता पकड़ लेते हैं। हम देखते हैं कि रन बनाने के लिए कई बार बैट्समैन आसान गेंद पर गलत शॉट खेलकर आउट हो जाता है। कई बार बैट्समैन गलत वक्त पर खराब शॉट खेलकर आउट हो जाता है। इनवेस्टमेंट के मामले में भी हम कई बार ऐसा करते हैं।

हम एसेट एलोकेशन का महत्व जानते हुए भी इसकी अनदेखी करते हैं। एसेट एलोकेशन का मतलब कई तरह के एसेट क्लास में इनवेस्ट करना है। इसमें शेयर, डेट और गोल्ड शामिल है। हमें एसेट एलोकेशन के साथ लंबे तक अपना इनवेस्टमेंट बनाए रखना होता है। लेकिन, बाजार में गिरावट आते ही हम डर जाते हैं। 2008 में शेयर 60 फीसदी तक गिर गिए थे। फिर 2020 में कोरोना की महामारी शुरू होने पर शेयर मार्केट 30 फीसदी गिर गए। बाजार की गिरावट ने इनवेस्टर्स को डरा दिया। फिर उन्होंने अपने शेयर बेच दिए।

दरअसल, हम सभी बुनियादी बातों को जानते तो हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं करते। हम 'हर्ड मेंटालिटी' के शिकार हो जाते हैं। जब सभी लोग शेयर खरीद रहे होते हैं तो हम भी खरीदना शुरू कर देते हैं। जब सब लोग बेच रहे हो तो हम भी बेचना शुरू कर देते हैं। इसके उलट हमें बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान भी अपने निवेश को बनाए रखना फायदेमंद होता है।

अगर आपने म्यूचुअल फंड्स के जरिए शेयरों में निवेश किया है तो फिर आपको बाजार की गिरावट से घबराने की कोई जरूरत नहीं है। शेयर बाजार के रिटर्न का इतिहास बताता है कि लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखने पर आपको बहुत अच्छा रिटर्न मिलता है। अगर आप म्यूचुअल फंड के एसआईपी के जरिए निवेश कर रहे हैं तो आपको कॉस्ट एवरेज बेनेफिट भी मिलेगा। इसका मतलब है कि लंबी अवधि में आपकी खरीद कीमत कम होगी। इसलिए इनवेस्टमेंट के लिए ठोस रणनीति बनाए, फिर उस पर धैर्य के साथ अमल करें। फिर आपका जीतना तय है।

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