इन दिनों निवेशकों में कॉर्पोरेट बॉन्ड्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है, खासकर उन लोगों में जो एफडी से ज्यादा रिटर्न चाहते हैं और थोड़ा रिस्क लेने को तैयार हैं। कंपनियां कॉर्पोरेट बॉन्ड्स के जरिए ऑपरेशनल ग्रोथ और विस्तार के लिए फंड जुटाती हैं। इन बॉन्ड्स पर निवेशक को तय समय तक फिक्स्ड ब्याज मिलता है, और पूरी प्रक्रिया को सेबी देखता है।
कितना मिल सकता है रिटर्न?
सेबी के RFQ (Request For Quote) प्रोटोकॉल के बाद से डिजिटल ट्रेडिंग और ट्रांसपेरेंसी बढ़ी है, जिससे कॉर्पोरेट बॉन्ड्स मार्केट में जबरदस्त ग्रोथ आई। कई हाई-यील्ड बॉन्ड्स पर 9% से 14% तक वार्षिक ब्याज मिल रहा है, खासकर शॉर्ट-टर्म में। मगर, सिर्फ रिटर्न देखकर इन्वेस्ट करने का फैसला लेना सही नहीं है। रिपोर्ट कहते हैं कि थोड़ा रिस्क लेकर ही ज्यादा रिटर्न कमाया जा सकता है, लेकिन इससे पहले कंपनी का इतिहास, रिस्क मैनेजमेंट और सिक्योरिटी जरूर जांच लें।
कॉर्पोरेट बॉन्ड्स की खासियत है कि इसमें क्रेडिट रेटिंग, ब्याज की संरचना, और गारंटी के हिसाब से काफी वैरायटी होती है। इनकी लिक्विडिटी और टैक्स नियम भी अलग हैं, और एफडी से ज्यादा रिस्की होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले कंपनी का डिफॉल्ट रिस्क (D से AAA तक रेटिंग), मैनेजमेंट, और फ्रॉड की संभावना अच्छी तरह जांचें।
उदाहरण के लिए Progfin कंपनी ने अक्टूबर में BBB+ रेटिंग वाला बॉन्ड जारी किया है, जो 14 महीनों में 11.75% यील्ड दे रहा है।
फंड एलोकेशन और लिक्विडिटी का ध्यान जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, 5 साल तक की शॉर्ट मच्योरिटी वाले बॉन्ड्स में बेहतर रिटर्न मिलता है, जबकि लंबी अवधि के लिए इक्विटी ज्यादा फायदेमंद है। अगर जल्दी पैसे की जरूरत हो तो इक्विटी में नहीं बल्कि कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में इन्वेस्ट करें।
कहां और कैसे खरीद सकते हैं?
ग्रिप, विंटवेल्थ जैसी Sebi-रजिस्टरड ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म (OBPP) से आप कॉर्पोरेट बॉन्ड्स खरीद सकते हैं। ये प्लेटफॉर्म निवेश और ट्रांजेक्शन के लिए लगभग 1% फीस लेते हैं।
कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में ज्यादा रिटर्न के साथ जोखिम भी है, और फ्रॉड के मामले भी बढ़ रहे हैं। निवेश से पहले पर्सनल फाइनेंस एडवाइजर से सलाह लें और अपना पोर्टफोलियो बैलेंस रखें। समझदारी और पूरी रिसर्च के साथ ही इसमें पैसे लगाना सही रहेगा।