ITR Filing 2026: सैलरी वालों के लिए इनकम टैक्स के 7 बड़े नियम, नोटिस से बचने के लिए इन्हें समझना जरूरी

ITR Filing 2026: नौकरी करने वाले लोगों के लिए इनकम टैक्स के कई नियम समझना जरूरी है। गलत टैक्स रिजीम चुनने, साइड इनकम छिपाने या दस्तावेज सही न रखने पर नोटिस आ सकता है। जानिए सैलरी वालों के लिए टैक्स से जुड़े 7 बड़े नियम।

अपडेटेड May 20, 2026 पर 2:56 PM
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नौकरीपेशा लोगों के लिए Form 16 काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

ITR Filing 2026: नौकरी करने वाले कई लोगों को लगता है कि खाते में आने वाली पूरी सैलरी पर टैक्स देना पड़ता है, लेकिन ऐसा नहीं होता। सैलरी में बेसिक पे, HRA, स्पेशल अलाउंस, बोनस और दूसरे कई हिस्से शामिल होते हैं। इनमें से कुछ हिस्सों पर टैक्स छूट भी मिल सकती है। इसलिए सिर्फ CTC देखकर टैक्स तय नहीं होता। आइए जानते है कि 2026 का इनकम टैक्स रिटर्न (ITR Filing 2026) फाइल करते समय सैलरीड क्लास को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा

सरकार सैलरीड कर्मचारियों को स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा देती है। इसका मतलब यह है कि एक तय रकम सीधे आपकी टैक्सेबल इनकम से घटा दी जाती है। अच्छी बात यह है कि इसके लिए अलग से कोई बिल या खर्च दिखाने की जरूरत नहीं होती।


टैक्स रिजीम का फर्क

अब कर्मचारियों के पास ओल्ड टैक्स रिजीम और न्यू टैक्स रिजीम में से चुनने का विकल्प होता है। पुरानी टैक्स व्यवस्था में 80C, HRA, होम लोन और दूसरी कई टैक्स छूट मिलती हैं। वहीं नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स स्लैब कम होते हैं, लेकिन ज्यादातर छूट खत्म हो जाती हैं।

किस व्यक्ति के लिए कौन सी व्यवस्था बेहतर रहेगी, यह उसकी सैलरी, निवेश और खर्च पर निर्भर करता है। इसलिए बिना हिसाब लगाए कोई विकल्प चुनना नुकसानदायक हो सकता है।

Form 16 सबसे जरूरी दस्तावेज

नौकरीपेशा लोगों के लिए Form 16 काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें यह जानकारी होती है कि कंपनी ने कितनी सैलरी दी, कितना TDS काटा और कौन-कौन सी टैक्स कटौतियां लागू हुईं।

ITR भरते समय यह दस्तावेज काफी काम आता है। हालांकि सिर्फ Form 16 के भरोसे रहना भी सही नहीं माना जाता, क्योंकि दूसरी आय भी अलग से दिखानी पड़ सकती है।

निवेश और टैक्स बचत के दस्तावेज

अगर आपने ELSS, PPF, लाइफ इंश्योरेंस, होम लोन या दूसरी टैक्स बचत योजनाओं में निवेश किया है, तो उनसे जुड़े दस्तावेज संभालकर रखना जरूरी है।

गलत जानकारी देने या जरूरत पड़ने पर दस्तावेज न दिखा पाने की स्थिति में बाद में आयकर विभाग सवाल पूछ सकता है।

साइड इनकम छिपाने से मुश्किल

आजकल कई नौकरीपेशा लोग सैलरी के अलावा फ्रीलांसिंग, यूट्यूब, ट्रेडिंग, ब्याज या किराए से भी कमाई करते हैं। लेकिन कुछ लोग इसे ITR में नहीं दिखाते।

आयकर विभाग अब AIS और दूसरे डिजिटल सिस्टम के जरिए कई वित्तीय लेनदेन ट्रैक करता है। ऐसे में साइड इनकम छिपाने पर नोटिस या पेनाल्टी का जोखिम बढ़ सकता है।

टैक्स नहीं बन रहा, फिर भी भरें ITR

कई लोगों को लगता है कि अगर टैक्स देनदारी नहीं बन रही है, तो ITR फाइल करने की जरूरत नहीं है। लेकिन कई मामलों में ITR भरना जरूरी या फायदेमंद हो सकता है।

जैसे अगर किसी व्यक्ति को बैंक लोन लेना हो, वीजा के लिए आवेदन करना हो या भविष्य में आय का आधिकारिक रिकॉर्ड दिखाना हो, तो ITR काफी काम आता है।

पहले से करें टैक्स प्लानिंग

एक्सपर्ट्स का मानना है कि टैक्स बचाने की योजना वित्त वर्ष के आखिर में नहीं, बल्कि शुरुआत से बनानी चाहिए। इससे बेहतर निवेश फैसले लेने और गैरजरूरी टैक्स बचाने में मदद मिल सकती है।

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