बड़े टैक्सपेयर्स को जल्द पूरी तरह से ऑटोमेटेड टैक्स फाइलिंग्स और कंप्लायंस का इस्तेमाल करना पड़ेगा। बड़े टैक्सपेयर्स के तहत कंपनियां, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) और मल्टीनेशनल कंपनियां शामिल होंगी। केंद्र सरकार ने थर्ड पार्टी के लिए अपने टैक्स पोर्टल के अप्लिकेशन प्रोग्रामिंड इंटरफेस (एपीआई) एक्सेस को ओपन कर दिया है।
सरकार जीएसटी सिस्टम के लिए एपीआई एक्सेस दे चुकी है
सरकार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) सिस्टम के लिए पहले ही एपीआई एक्सेस दे चुकी है। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, अब सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टमर्स के तहत डायरेक्ट टैक्सेज के लिए एक्सेस दिया जा सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक्सेस मिल जाने के बाद कंसल्टिंग फर्म्स और टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल्स बना सकेंगे।
टैक्स फाइलिंग में मानवीय हस्तक्षेप कम हो जाएगा
एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि एक्सेस मिल जाने के बाद टैक्स फाइलिंग और टैक्स कंप्लायंस में मानवीय हस्तक्षेप (Manual Intervention) घट जाएगा। सरकार का यह कदम इसलिए अहम है, क्योंकि अभी बड़ी कंपनियों को फाइलिंग्स, जीएसटी से जुड़े नोटिसेज और विवाद, इनकम टैक्स और कस्टमर्स को ट्रैक करने के लिए कई सरकारी पोर्टल्स का इस्तेमाल करना पड़ता है।
टैक्स अपील की ट्रैकिंग के अभी मैनुअल चेक जरूरी
अब ज्यादातर रिटर्न ऑनलाइन फाइल हो रहे हैं, लेकिन टैक्स अपील की ट्रैकिंग जैसे कई प्रोसेसेज के लिए मैनुअल चेक जरूरी होता है। इस बारे में प्रतिक्रिया के लिए फाइनेंस मिनिस्ट्री को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला। इस मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया, "सरकार की तरफ से जारी APIs से टैक्स कंप्लांयस में बड़ा बदलाव आएगा। इससे कामकाज टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा।"
एआई टूल्स के साथ एक्सेस को कंबाइन किया जा सकेगा
उन्होंने कहा कि ये एपीआई बड़े टैक्सपेयर्स को अपनी इनटर्नल अकाउंटिंग और कंप्लायंस सिस्टम को सीधे सरकार के टैक्स ईकोसिस्टम से इंटिग्रेट करने की इजाजत देते हैं। उन्होंने कहा कि कंसल्टेंट्स अब ऐसा सिस्टम बनाने के लिए एआई टूल्स के साथ इस एक्सेस को कंबाइन कर सकेंगे, जिसके लिए काफी कम मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत होगी।
अभी ट्राइब्यूनल की वेबसाइट पर बार-बार जाना पड़ता है
उदाहरण के लिए अभी जब इनकम टैक्स एपेलेट ट्राइब्यूनल के पास अपील फाइल की जाती है तो टैक्सपेयर्स को अपडेट्स ट्रैक करने के लिए ट्राइब्यूनल की वेबसाइट पर बार-बार जाना पड़ता है। एपीआई-आधारित इंटिग्रेशन से ऐसे अपडेट्स सीधे कंपनी के इनटर्नल सिस्टम में आ जाएंगे।
जीएसटी के मामले में एपीआई एक्सेस के फायदे मिल रहे
जीएसटी के मामले में एपीआई पहले से ही कंपनियों को अपने वेंडर्स के एमएसएमई स्टेटस को मॉनिटर करने और स्पेशल प्रोविजंस को ऑटोमैटिकली कंप्लाई करने की इजाजत देता है। इसमें 45 दिन के अंदर एमएसएमई ड्यूज के पेमेंट जैसी चीजें शामिल हैं। कस्टमर्स कंप्लायंस दूसरा एरिया है, जिसे इससे फायदा हो सकता है।
टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस सुइट का स्कोप बढ़ेगा
कंसल्टिंग फर्म PwC ने मनीकंट्रोल को बताया कि उसने पहले ही जीएसटी एपीआई के इस्तेमाल से एक टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस सुइट (Suite) बना चुका है। पीडब्ल्यूसी का मानना है कि डायरेक्ट टैक्सेज और कस्टमस के लिए एक्सेस ग्रांट होने के बाद इसका स्कोप और बढ़ सकता है।