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शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने से पहले जान लें टैक्स के नियम, नहीं तो मुनाफा हो जाएगा कम

शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के शेयर या म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीम की यूनिट्स बेचने पर मुनाफे के अमाउंट पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगता है या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगता है। दोनों में से कौन सा टैक्स लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप निवेश के कितने समय बाद शेयर बेचते हैं

Rakesh Ranjanअपडेटेड Jul 09, 2026 पर 5:16 PM
शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने से पहले जान लें टैक्स के नियम, नहीं तो मुनाफा हो जाएगा कम
शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स का रेट 20 फीसदी है।

म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीमों में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ रही है। यह स्कीम शेयर बाजारों में लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में पैसा लगाती हैं। कई लोग सीधे शेयरों में निवेश करने से बचते हैं। वे म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीम में निवेश करना सुरक्षित मानते हैं। अगर आप म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम या सीधे शेयरों में पैसे लगाते हैं तो प्रॉफिट बुक करने से पहले आपको टैक्स के नियमों को जरूर जान लेना चाहिए।

टैक्स की वजह से एसेट से रिटर्न घट जाता है

एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्स की वजह से किसी एसेट से रियल रिटर्न घट जाता है। यह बात म्यूचुअल फंड्स की यूनिट और शेयरों पर भी लागू होती है। इसलिए इनवेस्टर्स को म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स या शेयर बेचने से पहले मुनाफे पर लगने वाले टैक्स के नियमों को ठीक तरह से समझ लेना चाहिए। कई बार इनवेस्टर्स टैक्स के नियमों को जाने बगैर शेयर और म्यूचुअल फंड्स बेच देते हैं, जिससे उनका रियल रिटर्न घट जाता है।

सिक्योरिटी रखने के समय से तय होता है टैक्स

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