लोन के लिए न्यूनतम CIBIL स्कोर जरूरी नहीं, जानिए फिर बैंक किस आधार पर देते हैं कर्ज
सरकार ने साफ किया है कि पहली बार लोन लेने वालों के लिए न्यूनतम CIBIL स्कोर जरूरी नहीं है। जानिए बैंक और NBFC पहली बार लोन लेने वाले ग्राहकों की पात्रता कैसे तय करते हैं और उन्हें किस आधार पर लोन देते हैं।
लोन अप्रूवल का पहला आधार आवेदक की कमाई और नौकरी की स्थिरता होती है।
पहली बार लोन लेने वालों के लिए राहत भरी खबर है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि लोन आवेदन के लिए किसी भी तरह का न्यूनतम CIBIL स्कोर अनिवार्य नहीं है। लोकसभा में मानसून सत्र के दौरान वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निर्देशों के अनुसार बैंकों को केवल क्रेडिट स्कोर कम होने या शून्य होने की वजह से किसी भी आवेदक का आवेदन खारिज नहीं करना चाहिए।
इसके बाद बड़ा सवाल यह है कि आखिर बैंक और NBFC किन आधारों पर तय करते हैं कि किसी ग्राहक को लोन देना है या नहीं। आइए जानते हैं
किस आधार पर लोन अप्रूव करते हैं बैंक?
हर बैंक या फिर नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) की कोशिश रहती है कि वह ऐसे ग्राहक को लोन दे, जो उसका पैसा आसानी से लौटा सके। इसमें CIBIL स्कोर काफी मदद करता है, क्योंकि इसमें ग्राहक की पूरी क्रेडिट हिस्ट्री होती है कि उसने कब कौन-सा कर्ज लिया और उसे टाइम पर चुकाया या नहीं।
लेकिन, जाहिर तौर पर पहली बार लोन या क्रेडिट कार्ड लेने वालों के पास इस तरह का कोई स्कोर होता नहीं। तो बैंक कुछ खास तरीकों का इस्तेमाल करके पता लगाते हैं कि जिस ग्राहक को वो कर्ज देने वाले हैं, वह उनका पैसा लौटा पाएगा या नहीं।
1- कमाई और नौकरी की स्थिरता: लोन अप्रूवल का पहला आधार आवेदक की कमाई और नौकरी की स्थिरता होती है। बैंक या NBFC नौकरीपेशा ग्राहकों की सैलरी स्लिप देखते हैं। वहीं, अपना रोजगार करने वालों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न और बिजनेस अकाउंट स्टेटमेंट देखे जाते हैं।
2. उम्र और प्रोफाइल: बैंकों के लिए आवेदक की उम्र और प्रोफाइल भी अहम होती है। न्यूनतम आयु सीमा आमतौर पर 21 साल होती है। साथ ही बैंक यह भी देखते हैं कि लोन रिटायरमेंट से पहले चुकाने की क्षमता है या नहीं। यह खासकर होम लोन जैसे बड़ी रकम वाले कर्ज में होता है।
3. मौजूदा कर्ज और EMI बोझ: बैंक Debt-to-Income Ratio (DTI) के आधार पर यह जांचते हैं कि आपकी कमाई का कितना हिस्सा पहले से कर्ज में जा रहा है। ज्यादा EMI बोझ होने पर नया लोन मंजूर करना मुश्किल हो सकता है। मंथली EMI आपकी इनकम का 40-50% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
4. बैंकिंग हिस्ट्री और सिक्योरिटी: जिन लोगों का CIBIL स्कोर नहीं है, उनके लिए बैंक सेविंग अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट या बिजनेस ट्रांजैक्शन जैसी बैंकिंग हिस्ट्री देखते हैं। वहीं होम, कार या गोल्ड लोन जैसे सिक्योर लोन में गिरवी रखी संपत्ति की वैल्यू भी अहम रहती है।
5. नौकरी और नियोक्ता की साख: मल्टीनेशनल कंपनी कंपनी (MNC) या सरकारी नौकरी करने वाले ग्राहकों को अधिक भरोसेमंद माना जाता है। वहीं अस्थायी काम या छोटे व्यवसाय वालों से बैंक अधिक डॉक्यूमेंट मांग सकते हैं।
क्रेडिट हिस्ट्री पर एक्सपर्ट की क्या राय है?
BASIC Home Loan के को-फाउंडर और सीईओ अतुल मोंगा के मुताबिक, वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का बयान साफ करता है कि पहली बार लोन लेने वालों का आवेदन केवल इसलिए रिजेक्ट नहीं किया जाएगा क्योंकि उनकी कोई क्रेडिट हिस्ट्री नहीं है। यह कदम उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो अब तक बैंकिंग सिस्टम से बाहर थे।
उन्होंने कहा, 'इससे यह भी साफ है कि अब बैंक और लेंडिंग कंपनियां लोन मंजूरी में सिर्फ CIBIL स्कोर पर निर्भर नहीं रहेंगी, बल्कि बिजली-पानी के बिल, डिजिटल पेमेंट जैसी दूसरी जानकारी भी देखी जाएगी। इससे फैसले ज्यादा निष्पक्ष और डेटा पर आधारित होंगे।'
अतुल मोंगा का कहना है कि सरकार के रुख से पहली बार लोन लेने वालों को भी फायदा होगा। मोंगा ने कहा, 'लोन लेने वालों के लिए इसका मतलब है कि अगर वे अपने खर्च और भुगतान में अनुशासन दिखाते हैं, तो उनके लोन पास होने की संभावना बढ़ जाएगी। यानी क्रेडिट हिस्ट्री न होने पर भी अब उन्हें औपचारिक लोन आसानी से मिल सकेगा, और लेंडिंग के नियमों से भी समझौता नहीं करना पड़ेगा।'