Mothers Day 2026: क्यों मार्क जुकरबर्ग की मां ने कभी बेटे को सवाल पूछने से नहीं रोका? यही आदत बना गई Facebook का मालिक

Mothers Day 2026: आज Mark Zuckerberg को पूरी दुनिया Facebook बनाने वाले टेक जीनियस के तौर पर जानती है। अरबों लोगों को जोड़ने वाला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनाने वाले मार्क जुकरबर्ग बचपन से ही अलग थे

अपडेटेड May 09, 2026 पर 7:10 AM
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Mothers Day 2026: आज Mark Zuckerberg को पूरी दुनिया Facebook बनाने वाले टेक जीनियस के तौर पर जानती है।

Mothers Day 2026: आज Mark Zuckerberg को पूरी दुनिया Facebook बनाने वाले टेक जीनियस के तौर पर जानती है। अरबों लोगों को जोड़ने वाला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनाने वाले मार्क जुकरबर्ग बचपन से ही अलग थे। उन्हें नई चीजें समझने, मशीनों से खेलने और सवाल पूछने की आदत थी। लेकिन उनकी इस जिज्ञासा को दबाने के बजाय उनकी मां Karen Rita Kempner Zuckerberg ने हमेशा बढ़ावा दिया।

Karen Rita Kempner जुकरबर्ग पेशे से मनोचिकित्सक थीं। घर का माहौल ऐसा था जहां बच्चों को सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रखा जाता था। सवाल पूछना, नई चीजें सीखना और एक्सपेरिमेंट करना वहां सामान्य बात थी। मार्क के अंदर बचपन से टेक्नोलॉजी को लेकर जो उत्सुकता थी, उसे परिवार ने कभी समय की बर्बादी नहीं कहा।

कहा जाता है कि मार्क जुकरबर्ग बचपन में घंटों कंप्यूटर के सामने बैठकर नई-नई चीजें सीखते रहते थे। कई माता-पिता जहां बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने की कोशिश करते हैं, वहीं रीटा और उनके पति ने यह समझ लिया था कि उनका बेटा सिर्फ गेम नहीं खेल रहा, बल्कि कुछ अलग सोच रहा है।


मार्क के पिता ने घर में कंप्यूटर लाकर दिया, लेकिन उस माहौल को खुला और सपोर्टिव बनाने में उनकी मां का भी बड़ा रोल था। रीटा जुकरबर्ग ने बच्चों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालने के बजाय उन्हें अपनी रुचि पहचानने की आजादी दी। यही वजह रही कि बहुत कम उम्र में मार्क ने कंप्यूटर प्रोग्रामिंग सीखनी शुरू कर दी थी।

मार्क जुकरबर्ग की जिंदगी की सबसे खास बात यह रही कि उनके घर में क्यों? पूछना गलत नहीं माना जाता था। रीटा जुकरबर्ग मानती थीं कि बच्चों की जिज्ञासा को कंट्रोल नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे सही दिशा देनी चाहिए। शायद यही सोच आगे चलकर दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों में से एक की नींव बनी।

आज जब लोग मार्क जुकरबर्ग की सफलता देखते हैं, तो उसके पीछे सिर्फ एक होशियार दिमाग नहीं, बल्कि ऐसी मां की सोच भी छिपी है जिसने अपने बच्चे को अपनी तरह से सीखने दिया। उन्होंने मार्क को यह एहसास दिलाया कि अलग होना कमजोरी नहीं, ताकत हो सकती है। मदर्स डे पर मार्क और रीटा जुकरबर्ग की कहानी यह बताती है कि कई बार बच्चों को सबसे बड़ा गिफ्ट महंगे खिलौने नहीं, बल्कि सवाल पूछने की आजादी होती है।

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