शेयर बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव का असर निवेशकों पर पड़ा है। कई इनवेस्टर्स अब निवेश के ऐसे विकल्प की तलाश कर रहे हैं, जिसमें बैंक एफडी से ज्यादा रिटर्न मिले और रिस्क शेयरों से कम हो। सीएनबीसी-आवाज के विशेष शो में डेट म्यूचुअल फंड्स की बारीकियों और उनके टैक्स नियमों पर चर्चा हुई।
डेट फंड्स क्या हैं और कैसे काम करते हैं?
डेट फंड्स ऐसे म्यूचुअल फंड हैं जो फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज जैसे कि सरकारी बॉन्ड्स (Government Bonds), डिबेंचर्स और कॉर्पोरेट पेपर्स में निवेश करते हैं। इनका टेन्योर (अवधि) और ब्याज दर (Rate of Interest) पहले से तय होती है।
डेट फंड्स में निवेश के फायदे क्या हैं?
क्या रिटर्न बैंक एफडी से ज्यादा है?
आमतौर पर डेट फंड्स 6.86% से लेकर 8.66% तक का सालाना रिटर्न देते हैं। यह बैंक एफडी से ज्यादा है। कई लोगों के लिए बैंक एफडी निवेश का भरोसेमंद माध्यम रहा है। लेकिन, अब इसमें लोगों की दिलचस्पी घट रही है।
डेट फंड्स में निवेश करने से पहले टैक्स नियमों को समझना बहुत जरूरी है। 1 अप्रैल, 2023 से डेट फंड के टैक्स के नियम बदल गए हैं। डेट फंड्स की यूनिट्स बेचने से होने वाला मुनाफा आपकी इनकम में जुड़ जाता है और उस पर टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि निवेशक ने कितने समय तक निवेश बनाए रखा।
प्रमुख फंड्स का प्रदर्शन कितना है?
Aditya Birla Sun Life AMC ने एक साल में 8.66% रिटर्न दिया है। Nippon India Mutual Fund का रिटर्न एक साल में 7.5% है। हालांकि, कई डेट फंड्स का रिटर्न इस दौरान कम रहा है।
ऐसे इनवेस्टर्स जो शेयरों में उतार-चढ़ाव के रिस्क को बर्दाश्त नहीं कर सकते वे म्यूचुअल फंड्स की डेट स्कीम में निवेश कर सकते हैें। खासकर बैंक एफडी के मुकाबले इनमें निवेश करना फायदेमंद साबित हो सकता है।
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