कुछ इंटरनेशनल फंडों ने निवेशकों से निवेश लेना शुरू किया है। इनमें सिप, एकमुश्त या दोनों तरीकों से निवेश किया जा सकता है। यह उन निवेशकों के लिए बड़ा मौका है, जो अमेरिका, यूरोप, जापान, ताइवान की कंपनियों के शेयरों में निवेश करना चाहते हैं। एक्सपर्ट्स इनवेस्टर्स को कुछ पैसा इंटरनेशनल फंडों में निवेश करने की सलाह देते हैं। इससे पोर्टफोलियो के डायवर्सिफिकेशन में मदद मिलती है।
इंटरनेशनल फंड्स हमेशा खुले नहीं रहते हैं
म्यूचुअल फंडों की इंटरनेशनल स्कीमें निवेश के लिए हमेशा खुली नहीं रहती हैं। इसकी वजह यह है कि आरबीआई ने म्यूचुअल फंडों के लिए विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश की सीमा तय की है। म्यूचुअल फंडों का विदेशी कंपनियों में निवेश जब इस लिमिट तक पहुंच जाता है तो वे निवेशकों से नया निवेश लेना बंद कर देते हैं।
इन स्कीमों में इनवेस्टर्स कर सकते हैं निवेश
अभी कुछ म्यूचुअल फंड हाउस अपनी इंटरनेशनल स्कीम में निवेश ले रहे हैं। इनमें एक्सिस ग्लोबल इक्विटी अल्फा एफओएफ, एक्सिस ग्लोबल इनोवेशन एफओएफ, बड़ौदा बीएनपी पारिबा एक्वा एफओएफ, फ्रैंकलिन एशियन इक्विटी, कोटक ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट ओवरसीज इक्विटी ओमनी एफओएफ, निप्पॉन इंडिया ताइवान इक्विटी, एडलवाइज आसियान इक्विटी ऑफशोर शामिल हैं।
प्रति पैन प्रति माह 2 लाख रुपये तक निवेश
इनवेस्टर्स इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड स्कीम में प्रति पैन प्रति माह 2 लाख रुपये तक का निवेश कर सकते हैं। बीते एक साल में इंटरनेशनल म्यूचुअल फंडों का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है। खासकर ताइवान और सेमीकंडक्टर कंपनियों वाले मार्केट्स में निवेश करने वाले इंटरनेशनल म्यूचु्अल फंडों ने शानदार रिटर्न दिए हैं। अमेरिकी बाजार में निवेश करने वाले इंटरनेशनल फंडों का रिटर्न भी अट्रैक्टिव रहा है। इसकी बड़ी वजह अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में आई तेजी है।
बीते एक साल में इंटरनेशनल फंडों का रिटर्न शानदार
ज्यादातर इंटरनेशनल फंडों का तीन साल में रिटर्न करीब 20 फीसदी रहा है। हालांकि, पांच साल में रिटर्न इससे काफी कम रहा है। इसके अलावा फंडों का प्रदर्शन इस बात पर भी निर्भर रहा है कि उन्होंने किन देशों की कंपनियों में निवेश किया है। उदाहरण के लिए चीन के शेयर बाजार में निवेश करने वाले फंडों का प्रदर्शन कमजोर रहा है। दूसरी तरफ अमेरिका में निवेश करने वाले फंडों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा है।
इंटरनेशनल फंडों में निवेश के क्या हैं फायदे?
निवेश में डायवर्सिफिकेशन का फायदा यह है कि जब किसी एक बाजार का प्रदर्शन खराब रहता है तो दूसरे बाजार का बेहतर हो सकता है। उदाहरण के लिए भारतीय बाजार का प्रदर्शन बीते डेढ़ से दो साल में कमजोर रहा है। इस अवधि में दूसरे बाजारों खासकर जापान, दक्षिण कोरिया, अमेरिका का प्रदर्शन बेहतर रहा है। सिर्फ भारतीय कंपनियों के शेयरों में निवेश करने वाले निवेशकों का रिटर्न इस दौरान काफी कम रहा है। लेकिन, इंटरनेशनल फंडों में निवेश करने वाले निवेशकों ने अच्छा रिटर्न कमाया है।