म्यूचुअल फंडों की स्मॉलकैप और मिडकैप स्कीमों ने पिछले तीन साल में निवेशकों को मालामाल किया है। यही वजह है कि इन स्कीमों में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। एंफी के आंकड़ों से इस बात की पुष्टि होती है। पिछले चार साल में मिडकैप फंडों के इनवेस्टर अकाउंट की संख्या करीब दोगुनी यानी 1.4 करोड़ हो गई है। स्मॉलकैप फंडों के इनवेस्टर अकाउंट की संख्या करीब चार गुनी यानी 1.9 करोड़ हो गई है। मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों में निवेश करने से पहले आपको कुछ बुनियादी बातों को जान लेना जरूरी है। सबसे पहले यह कि इन फंडों में निवेश करने में रिस्क ज्यादा है।
नए निवेशकों के लिए नहीं हैं स्मॉलकैप और लार्जकैप फंड
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आपको दूसरों को देखकर मिडकैप और स्मॉलकैप स्कीमों में निवेश नहीं करना चाहिए। आपको इनमें निवेश तभी करना चाहिए, जब आप रिस्क उठाने के लिए तैयार हैं। यही वजह है कि नए निवेशकों को एक्सपर्ट्स इन फंडों में निवेश करने की सलाह नहीं देते हैं। नए निवेशकों को लार्जकैप फंडों में निवेश करना चाहिए। फिर स्टॉक मार्केट की बारीकियों को समझने के बाद ही किसी को स्मॉलकैप और मिडकैप का रुख करना चाहिए।
सेबी के नियमों के मुताबिक, स्मॉलकैप फंड को अपना कम से कम 65 फीसदी पैसा स्मॉलकैप कंपनियों के स्टॉक्स में करना जरूरी है। मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से 250 और इससे ज्यादा रैंक वाली कंपनियां स्मॉलकैप कैटेगरी के तहत आती हैं। इसी तरह मिडकैप फंडों के लिए अपने पैसे का कम से कम 65 फीसदी मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करना जरूरी है। मिडकैप कैटेगरी में मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से 101 से 250 तक की रैंकिंग वाली कंपनियां आती हैं।
छोटी अवधि के लिए नहीं करें मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश
फिसडम के रिसर्च हेड नीरव कारकेरा ने कहा, "मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों की ग्रोथ की संभावना ज्यादा होती है। लेकिन, एनालिस्ट्स लार्जकैप कंपनियों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों को कम ट्रैक करते हैं।" ये कंपनियां मार्केट की स्थिति में बदलाव पर तेजी से रिएक्ट करती हैं। इसलिए इनके शेयरों की कीमतों में छोटी अवधि में ज्यादा उतारचढ़ाव दिख सकता है। लेकिन, लंबी अवधि में इनका रिटर्न ज्यादा होता है।
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रिस्क ले सकते हैं तभी करें निवेश
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ज्यादा रिटर्न कमाने के लिए कोई इनवेस्टर मिडकैप या स्मॉलकैप फंडों में पैसे लगाना चाहता है तो उसे यह निवेश लंबी अवधि के लिए करना चाहिए। साथ ही उसे थोड़ा रिस्क लेने के लिए तैयार रहना चाहिए। छोटी अवधि के लिए इनमें निवेश करने पर फायदे की जगह नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे निवेशक को मार्केट में आई गिरावट पर चिंता नहीं करनी चाहिए। उसे यह समझना चाहिए कि उसका निवेश लंबी अवधि के लिए है, जिससे उसके इनवेसमेंटट पर उतारचढ़ाव का असर नहीं पड़ेगा।