नए इनकम टैक्स नियम के ड्राफ्ट जारी हो गए हैं। इसमें कहा गया है कि 5 लाख रुपये से कम वैल्यू के मोटर व्हीकल ट्रांजेक्शन के लिए पर्मानेंट अकाउंट नंबर (पैन) बताना जरूरी नहीं होगा। इसका मतलब है कि 5 लाख रुपये से कम वैल्यू की कार या दूसरी व्हीकल या मोटरसाइकिल खरीदने और बेचने वाले को अपना पैन बताना जरूरी नहीं होगा। अभी व्हीकल खरीदने या बेचने के लिए पैन बताना जरूरी है। व्हीकल की वैल्यू चारे जितनी हो, पैन नंबर बताना जरूरी है।
किस-किस ट्रांजेक्शंस पर पैन बताना होगा?
Income Tax डिपार्टमेंट ने नए इनकम टैक्स नियमों के बारे में 22 फरवरी तक राय मांगी है। ड्राफ्ट रूल्स 159 में यह बताया गया है कि किस तरह के फाइनेंशियल और हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शंस में PAN बताना जरूरी होगा। इस रूल में कहा गया है कि बैंक या डीमैट अकाउंट ओपन करे, क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करने, बड़े अमाउंट के कैश डिपॉजिट या विड्रॉल, म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स, बॉन्ड्स या सिक्योरिटीज खरीदने, ज्यादा वैल्यू की मोटर व्हीकल्स खरीदने या प्रॉपर्टी खरीदने पर पैन बताना होगा। होटल या किसी इवेंट के लिए ज्यादा अमाउंट का बिल चुकाने पर भी पैन बताना होगा। रूल 150 का मकसद बड़े फाइनेंशियल को ट्रैक करना, टैक्स कंप्लायंस बढ़ाना और टैक्स चोरी के मामलों को रोकना है।
ट्रांजेक्शंस वैल्यू एक सीमा से ज्यादा होने पर पैन बताना होगा
नए नियम के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति एक फाइनेंशियल ईयर में किसी एक बैंक अकाउंट या एक से ज्यादा बैंक अकाउंट में 10 लाख रुपये या इससे ज्यादा कैश डिपॉजिट करता है या 10 लाख या इससे ज्यादा विड्रॉल करता है तो पैन बताना होगा। अभी एक दिन में बैंक अकाउंट में 50,000 रुपये से ज्यादा कैश डिपॉजिट करने पर पैन बताना होता है। होटल या रेस्टॉरेंट, कनवेंशन सेंटर या बैंक्वेट हॉल का 1 लाख रुपये से ज्यादा बिल चुकाने पर पैन बताना होगा। अभी होटल या रेस्टॉरेंट का बिल 50,000 रुपये से ज्यादा होने पर पैन बताना जरूरी है।
1 अप्रैल से लागू होंगे नए इनकम टैक्स रूल्स
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को यूनियन बजट में कहा था कि इनकम टैक्स एक्ट, 2025 इस साल 1 अप्रैल से लागू हो जाएगा। यह एक्ट इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह लेगा। नए इनकम टैक्स एक्ट में रूल्स की संख्या कम की गई है। नियमों की लैंग्वेज को आसान बनाने की कोशिश की गई है। नए नियमों को आम आदमी आसानी से समझ सकता है। इसके लिए टैक्स एक्सपर्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के नियमों की भाषा आसान नहीं है। इससे टैक्सपेयर्स को दिक्कत होती है।