सरकार इनकम टैक्स बिल, 2025 में कई बड़े बदलाव कर सकती है। बैजयंत पांडा की अगुवाई वाली एक संसदीय समिति ने इस बिल की स्टडी करने के बाद कुछ सुझाव दिए हैं। 31 सदस्यीय समिति के कई सुझावों को ध्यान में रख सरकार इस बिल में संसोधन कर सकती है। इनमें से कई सुझाव टैक्सपेयर्स के हित में हैं। मनीकंट्रोल इनमें से कुछ ऐसे सुझावों के बारे में बता रहा है, जो टैक्सपेयर्स के फायदे के लिए हैं।
बिलेटेड रिटर्न पर भी रिफंड की इजाजत
नया इनकम बिल, 2025 फरवरी में लोकसभा में पेश होने के बाद इसके उस नियम की काफी चर्चा हुई थी, जिसमें देर से रिटर्न फाइलिंग पर रिफंड की इजाजत नहीं दी गई है। इसका मतलब है कि ऐसे टैक्सपेयर्स जो डेडलाइन के बाद रिटर्न फाइल करेंगे उन्हें रिफंड नहीं मिलेगा। संसदीय समिति ने अपनी सिफारिश में कहा है कि अगर कोई टैक्सपेयर्स अंतिम तारीख के बाद भी रिटर्न फाइल करता है तो उसे रिफंड मिलना चाहिए।
कई छोटे टैक्सपेयर्स और सीनियर सिटीजंस को सिर्फ अतिरिक्त TDS पर रिफंड के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना पड़ता है। रिटर्न नहीं फाइल करने पर कई तरह का नुकसान होता है। संसदीय समिति ने कहा है कि सिर्फ पेनाल्टी से बचने के लिए रिटर्न फाइल करने की जरूरत खत्म कर दी जानी चाहिए। इससे छोटे टैक्सपेयर्स को राहत मिल जाएगी।
हाउस प्रॉपर्टी इनकम पर स्टैंडर्ड डिडक्शन का कंप्यूटेशन
संसदीय समित ने हाउस प्रॉपर्टी की इनकम पर स्टैंडर्ड डिडक्शन के कंप्यूटेशन के नियमों को आसान बनाने की सलाह दी है। उसने कहा है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि 30 फीसदी स्टैंडर्ड डिडक्शन का कैलकुलेशन म्युनिसिपल टैक्सेज घटाने के बाद होगा। यह मौजूदा नियमों के मुताबिक है, जिसमें हाउस प्रॉपर्टी की इनकम पर 30 फीसदी स्टैंडर्ड डिडक्शन का कैलकुलेशन म्युनिसिपल टैक्स को घटाने के बाद होता है।
संसदीय समिति का कहना है कि टैक्सपेयर्स की रेजिडेंसी के लिए मौजूदा नियमों को जारी रखा जाना चाहिए। मौजूदा नियम में रेजिडेंसी इस बात से तय होती है कि एक वित्त वर्ष में कोई व्यक्ति कम से कम कितना दिन विदेश में बिताता है। नए इनकम टैक्स बिल में रेजिडेंसी के नियमों में बदलाव की बात कही गई है।
सेक्शन 80जी के तहत डोनेशन
अभी सेक्शन 80जी के तहत मान्यताप्राप्त चैरिटेबल इंस्टीट्यूशंस को डोनेशन के अमाउंट पर 50-100 फीसदी तक डिडक्शन की इजाजत है। इसके लिए एडजस्टेड ग्रॉस टोटल इनकम की 10 फीसदी सीमा तय है। संसदीय समिति ने कहा है कि नए आईटी बिल में 'ग्रॉस टोटल इनकम' फ्रेज का इस्तेमाल किया गया है। इसकी जगह 'एडजस्टेड' ग्रॉस टोटल इनकम का इस्तेमाल होना चाहिए। इससे ज्यादा टैक्स लायबिलिटी का डर खत्म हो जाएगा।