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No Cost EMI: नो-कॉस्ट EMI के पीछे छिपा खेल! नहीं समझेंगे तो हो जाएगा भारी नुकसान

No Cost EMI: नो-कॉस्ट EMI आसान लगती है, लेकिन इसमें छुपे डिस्काउंट लॉस, प्रोसेसिंग फीस और GST आपकी जेब पर सीधा असर डालते हैं। जानिए कि नो-कॉस्ट EMI कैसे काम करती है और कब यह फायदा या नुकसान बन जाती है।

Edited By: Suneel Kumarअपडेटेड Feb 08, 2026 पर 11:09 PM
No Cost EMI: नो-कॉस्ट EMI के पीछे छिपा खेल! नहीं समझेंगे तो हो जाएगा भारी नुकसान
नो-कॉस्ट EMI कोई धोखा नहीं है, लेकिन यह अपने आप में कोई खास डील भी नहीं है।

No Cost EMI: नो-कॉस्ट EMI अब भारत के ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स पर लगभग डिफॉल्ट ऑप्शन बन चुकी है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, होम अप्लायंसेज, यहां तक कि फर्नीचर भी एक ही वादे के साथ बेचे जा रहे हैं- बिना ब्याज दिए आसान किस्तों में भुगतान।

कई खरीदारों को यह बढ़िया रास्ता भी लगता है। न एकमुश्त बड़ी रकम देनी पड़ती है और न ही सेविंग्स को हाथ लगाना पड़ता है। लेकिन असलियत अक्सर इससे ज्यादा उलझी होती है।

No Cost EMI क्या होती है?

टैक्समैनेजर.इन के फाउंडर और सीईओ दीपक कुमार जैन के मुताबिक, नो-कॉस्ट EMI का मतलब यह होता है कि जब आप कोई प्रोडक्ट किस्तों में खरीदते हैं, तो आपसे सीधे तौर पर ब्याज नहीं लिया जाता। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि यह सुविधा पूरी तरह मुफ्त होती है।

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