सालभर सोना न खरीदें! PM मोदी की अपील के बाद क्या गिरेंगे दाम? एक्सपर्ट्स ने कहा 2027 तक दिखेगा बड़ा 'प्राइस शॉक'

Gold Price Shock: भारत अपनी सोने की जरूरत का अधिकांश हिस्सा विदेशों से आयात करता है। जब भारत सोना आयात करता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अरबों डॉलर का भुगतान करना पड़ता है। इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है

अपडेटेड May 12, 2026 पर 3:01 PM
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सरकार चाहती है कि निवेशक 'फिजिकल गोल्ड' के बजाय आधुनिक विकल्पों को चुनें, ताकि देश को सोना इंपोर्ट न करना पड़े

Gold Investment: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नागरिकों से एक बड़ी अपील की है। पीएम ने आग्रह किया है कि कम से कम एक साल तक अनावश्यक सोना खरीदने से बचें। भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है, और शादी-त्योहारों के सीजन में भारी मात्रा में गोल्ड इंपोर्ट किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल रुपया मजबूत होगा, बल्कि भविष्य में गोल्ड की कीमतों में एक बड़ा 'प्राइस शॉक' भी देखने को मिल सकता है।

सोना न खरीदने की अपील क्यों?

भारत अपनी सोने की जरूरत का अधिकांश हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इसके ये प्रमुख आर्थिक कारण हैं:


विदेशी मुद्रा का दबाव: जब भारत सोना आयात करता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अरबों डॉलर का भुगतान करना पड़ता है। इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) पर दबाव पड़ता है।

रुपये की कमजोरी: भारी आयात के कारण डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे रुपया कमजोर होता है। रुपये की मजबूती से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस जैसी जरूरी चीजों की कीमतें घटाने में मदद मिल सकती है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा: नीति निर्माताओं का मानना है कि अगर लोग पैसा फिजिकल गोल्ड में दबाने के बजाय बैंक, म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में लगाएंगे, तो उस पैसे का इस्तेमाल देश के विकास और बुनियादी ढांचे के लिए किया जा सकेगा।

2027 तक ₹95000 पर आ जाएगा सोना?

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अगर भारतीय उपभोक्ता एक साल के लिए सोने की खरीदारी कम कर देते हैं, तो घरेलू मांग में अस्थायी रूप से नरमी आ सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों को अब भी उम्मीद है कि महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के कारण वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें मजबूत बनी रहेंगी। वैसे कुछ अनुमानों के अनुसार, 2027 तक भारत में सोने की कीमतें लगभग ₹85,000 से ₹95,000 प्रति 10 ग्राम तक गिर सकती हैं।

फिजिकल गोल्ड के 3 बेहतरीन विकल्प

सरकार चाहती है कि निवेशक 'फिजिकल गोल्ड' (गहने या ईंट) के बजाय आधुनिक विकल्पों को चुनें, ताकि देश को सोना आयात न करना पड़े:

Sovereign Gold Bonds (SGB): यह निवेश का सबसे सुरक्षित तरीका है। इसमें सोने की बढ़ती कीमतों का फायदा तो मिलता ही है, साथ ही सरकार सालाना ब्याज भी देती है।

Digital Gold: आप मात्र ₹1 से भी डिजिटल गोल्ड खरीद सकते हैं। इसे संभालने या चोरी होने का कोई डर नहीं रहता।

Gold ETFs: शेयर बाजार के जरिए सोने में निवेश करना एक पारदर्शी और आसान विकल्प है।

क्या होगा आम आदमी पर असर?

अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि अगर गोल्ड इंपोर्ट कम होता है और रुपया स्थिर रहता है, तो इससे देश में महंगाई कम होगी। दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें स्थिर रहने से मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है। पीएम की यह अपील इसी 'जन-भागीदारी' का हिस्सा है ताकि देश की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

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