Oil Price Crash: कच्चे तेल के दाम क्रैश, 16% गिरा भाव... ट्रंप के बयान का दिखा असर

Oil Price Crash: कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को तेज गिरावट आई। ब्रेंट और WTI दोनों में 16 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट दर्ज हुई। ट्रंप के ईरान पर सैन्य कार्रवाई टालने के बयान और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता का बाजार पर असर दिखा। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Mar 23, 2026 पर 6:17 PM
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कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को 16 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली।

Oil Price Crash: कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को 16 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि वह ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर संभावित सैन्य हमलों को फिलहाल टालने का आदेश देंगे। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई।

ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 16 प्रतिशत गिरकर 92 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर तक आ गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) करीब 13 डॉलर यानी लगभग 13.5 प्रतिशत गिरकर 85.28 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

ट्रंप ने पांच दिन के लिए टाली सैन्य कार्रवाई


ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों से मध्य पूर्व में चल रहे तनाव को खत्म करने को लेकर बातचीत हो रही है।

उन्होंने बताया कि इन चर्चाओं के माहौल को देखते हुए उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को निर्देश दिया है कि ईरान के बिजली संयंत्रों और ऊर्जा ढांचे पर होने वाली सभी सैन्य कार्रवाइयों को पांच दिनों के लिए टाल दिया जाए।

इससे पहले ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था कि वह वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दे। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इस मार्ग से सामान्य जहाजों की आवाजाही कब शुरू होगी।

गोल्डमैन सैक्स ने बढ़ाया तेल का अनुमान

इस बीच गोल्डमैन सैक्स ने तेल की कीमतों को लेकर अपने अनुमान बढ़ा दिए हैं। CNBC के मुताबिक बैंक का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई को लेकर जोखिम अभी भी बना हुआ है।

बैंक ने ब्रेंट क्रूड के लिए मार्च और अप्रैल में औसतन 110 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान लगाया है। पहले यह अनुमान 98 डॉलर था। वहीं WTI के लिए मार्च में 98 डॉलर और अप्रैल में 105 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान जताया गया है।

गोल्डमैन सैक्स के एनालिस्टों का कहना है कि अगर 10 अप्रैल तक होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई सामान्य स्तर के करीब 5 प्रतिशत तक ही सीमित रहती है, तो कीमतों में और तेजी आ सकती है।

उनका कहना है कि सप्लाई सीमित होने और अतिरिक्त उत्पादन क्षमता कम होने के कारण सरकारें अपने तेल भंडार बढ़ाने की कोशिश कर सकती हैं। इससे लंबी अवधि के तेल भाव भी ऊपर जा सकते हैं।

2008 के रिकॉर्ड से ऊपर जा सकता है तेल

गोल्डमैन सैक्स ने यह भी कहा है कि अगर तेल की सप्लाई में कमी करीब 10 सप्ताह तक बनी रहती है, तो ब्रेंट क्रूड 2008 के अपने रिकॉर्ड स्तर को भी पार कर सकता है।

ब्रेंट क्रूड जुलाई 2008 में करीब 147 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। बाद में वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान इसमें तेज गिरावट आई थी।

अगले 24 घंटे अहम: गीता गोपीनाथ

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ का कहना है कि तेल की कीमतों का निकट भविष्य काफी अनिश्चित बना हुआ है और यह काफी हद तक अगले 24 घंटों में होने वाली घटनाओं पर निर्भर करेगा।

CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि फिलहाल बाजार तेल की कीमत करीब 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मानकर चल रहा है। हालांकि अगर तनाव बढ़ता है तो कीमतें काफी ऊपर जा सकती हैं और 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर भी मुमकिन है।

उनके मुताबिक- तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और क्षेत्र में चल रहे संघर्ष पर निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार स्थिति साफ होने का इंतजार कर रहा है।

बाजार की अस्थिरता के केंद्र में होर्मुज

होर्मुज जलडमरूमध्य से आम तौर पर दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल सप्लाई गुजरती है। इसलिए इसे ऊर्जा बाजार के लिए सबसे अहम मार्गों में से एक माना जाता है।

ईरान की सरकारी मीडिया ने रविवार को कहा था कि तेहरान इस जलमार्ग से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति देगा। लेकिन, उन जहाजों को नहीं जो उसके हिसाब से 'ईरान के दुश्मनों' से जुड़े हैं।

मौजूदा तनाव पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच पैदा हुआ है, जिसमें समुद्री व्यापार मार्गों और ऊर्जा ढांचे को लेकर भी खतरे की स्थिति बनी हुई है।

IEA ने जताई गंभीर चिंता

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा कि मध्य पूर्व की स्थिति 'बहुत गंभीर' है। उनका कहना है कि इसका असर 1970 के दशक के तेल संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध के गैस बाजार पर पड़े असर से भी बड़ा हो सकता है।

IEA के सदस्य देशों ने 11 मार्च को रणनीतिक भंडार से रिकॉर्ड 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई थी, ताकि ईरान संघर्ष से पैदा सप्लाई समस्या को कम किया जा सके।

बिरोल ने कहा कि वह एशिया और यूरोप की सरकारों से भी अतिरिक्त भंडार जारी करने की संभावना पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बाजार को स्थिर करने का सबसे अहम कदम होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह फिर से खोलना होगा।

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