पहले हेल्थ इंश्योरेंस का मतलब यही होता था कि जब आप अस्पताल में भर्ती होंगे तभी आपको फायदा मिलेगा। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। OPD कवर यानी आउट पेशेंट डिपार्टमेंट कवर धीरे-धीरे हेल्थ इंश्योरेंस का अहम हिस्सा बन रहा है।
पहले हेल्थ इंश्योरेंस का मतलब यही होता था कि जब आप अस्पताल में भर्ती होंगे तभी आपको फायदा मिलेगा। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। OPD कवर यानी आउट पेशेंट डिपार्टमेंट कवर धीरे-धीरे हेल्थ इंश्योरेंस का अहम हिस्सा बन रहा है।
पॉलिसीबाजार की एक रिपोर्ट बताती है कि आज करीब 22% हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में OPD कवर शामिल है। तीन साल पहले ये सिर्फ 5% था। यानी लोग अब अस्पताल जाने से पहले, छोटी-मोटी बीमारियों या रोज़मर्रा के मेडिकल खर्च के लिए भी इंश्योरेंस का इस्तेमाल कर पा रहे हैं।
OPD कवर क्या होता है?
इसमें आपको डॉक्टर से मिलने, ब्लड टेस्ट, स्कैन, दवाइयां, डेंटल ट्रीटमेंट और हेल्थ चेकअप जैसे खर्चों पर कैशलेस सुविधा मिलती है। लगभग 90% OPD क्लेम बिना पैसे दिए सीधे इंश्योरेंस से निपट जाते हैं।
इससे लोगों को क्या फायदा हो रहा है?
लोग अब साल में 3–4 बार इंश्योरेंस का फायदा उठा रहे हैं, जबकि अस्पताल में भर्ती होने वाला क्लेम शायद सालों में एक बार ही होता है।
बीमारी बढ़ने से पहले इलाज: जिन लोगों के पास OPD कवर है, उनमें अस्पताल में भर्ती होने के मामले 5–10% तक कम हुए हैं।
ऑनलाइन डॉक्टर की सुविधा: अब आधे से ज्यादा लोग वीडियो या फोन कंसल्टेशन के जरिए इलाज करवा रहे हैं।
खर्च का हिसाब: OPD क्लेम में सबसे ज़्यादा खर्च डॉक्टर से मिलने (35–40%) और टेस्ट कराने (25–30%) पर होता है। दवाइयों पर लगभग 20–25% खर्च आता है।
कौन लोग ले रहे हैं ये सुविधा?
ग प्रोफेशनल्स इस सुविधा को चुन रहे हैं।
30–45 साल के लोग सबसे आगे (33%) हैं।
18–30 साल के युवाओं का हिस्सा 27% है।
बड़े शहरों मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई में इसकी मांग सबसे ज्यादा है।
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