PAN नियमों में बड़ा बदलाव! कैश डिपॉजिट से लेकर गाड़ी और प्रॉपर्टी खरीदने पर होगा असर

PAN Rules Change: ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 में PAN नियमों में बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं। इसका कैश ट्रांजैक्शन, गाड़ी खरीद, प्रॉपर्टी डील और होटल-इवेंट खर्चों में PAN के इस्तेमाल पर असर होगा। जानिए किन ट्रांजैक्शन पर बढ़ेगी और सरकार का इरादा क्या है।

अपडेटेड Feb 10, 2026 पर 11:09 PM
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अब दो-पहिया और चार-पहिया दोनों तरह के वाहनों की खरीद पर PAN तभी देना होगा, जब वाहन की कीमत 5 लाख रुपये से ज्यादा हो।

PAN Rules Change: ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 में PAN से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव किया गया है। इन बदलावों का सीधा असर कैश लेनदेन, गाड़ी की खरीद, प्रॉपर्टी डील और होटल-इवेंट से जुड़े खर्चों पर पड़ेगा। सरकार का मकसद छोटे और रोजमर्रा के ट्रांजैक्शंस में PAN की झंझट कम करना और बड़े लेनदेन पर निगरानी मजबूत करना है।

कैश जमा और निकासी के नियम

प्रस्तावित नियमों के तहत अब पूरे वित्त वर्ष में किसी एक या एक से ज्यादा बैंक खातों से 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा की कुल कैश जमा या निकासी होने पर ही PAN देना अनिवार्य होगा।


फिलहाल नियम यह है कि एक दिन में 50,000 रुपये से ज्यादा कैश जमा या निकासी पर PAN देना पड़ता है। नया प्रस्ताव इस सीमा को काफी बढ़ाता है।

मोटर व्हीकल खरीद पर PAN

ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, अब दो-पहिया और चार-पहिया दोनों तरह के वाहनों की खरीद पर PAN तभी देना होगा, जब वाहन की कीमत 5 लाख रुपये से ज्यादा हो।

अभी तक दो-पहिया को छोड़कर, हर मोटर वाहन की खरीद पर PAN अनिवार्य है, चाहे उसकी कीमत कितनी भी हो।

होटल, रेस्टोरेंट और इवेंट खर्च

होटल और रेस्टोरेंट के बिल, कन्वेंशन सेंटर, बैंक्वेट हॉल या इवेंट मैनेजमेंट सर्विस से जुड़े भुगतानों पर PAN देने की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है।

अब PAN तभी जरूरी होगा, जब भुगतान 1 लाख रुपये से ज्यादा हो। मौजूदा नियमों में यह सीमा 50,000 रुपये है।

प्रॉपर्टी लेनदेन से जुड़े बदलाव

जमीन या मकान की खरीद, बिक्री, गिफ्ट या जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट जैसे मामलों में PAN तब अनिवार्य होगा, जब ट्रांजैक्शन की वैल्यू 20 लाख रुपये से ज्यादा हो।

अभी यह सीमा 10 लाख रुपये है, जिसे दोगुना करने का प्रस्ताव है।

कुल मिलाकर क्या बदलेगा

ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 का फोकस यह है कि छोटे लेनदेन में लोगों को बार-बार PAN देने की जरूरत न पड़े, जबकि बड़े वित्तीय ट्रांजैक्शंस पर टैक्स विभाग की निगरानी और मजबूत हो। इससे आम लोगों को सुविधा मिलेगी और सिस्टम ज्यादा प्रैक्टिकल बन सकता है।

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