अगर आप पार्टनरशिप फर्म चला रहे हैं, तो आपको कुछ नए नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। जुलाई 2024 के बजट में Income Tax Act में Section 194T जोड़ा गया था। इसके तहत अब पार्टनरशिप फर्म्स को अपने पार्टनर्स को किए जाने वाले कुछ भुगतान पर TDS काटना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नियम 1 अप्रैल 2025 से लागू हो चुका है।
TDS उस समय लागू होगा जब भुगतान किया जाए या जब रकम पार्टनर के अकाउंट में क्रेडिट की जाए- जो भी पहले हो। यानी अगर आपने पैसा दिया नहीं है लेकिन अकाउंट में एंट्री कर दी है, तब भी TDS काटना पड़ेगा।
किन पेमेंट्स पर लगेगा TDS
इस नियम के तहत पार्टनर की सैलरी, रिम्यूनरेशन, कमीशन, बोनस और ब्याज शामिल हैं। ब्याज किसी भी अकाउंट पर हो सकता है, जिसमें कैपिटल अकाउंट भी शामिल है। यानी लगभग हर तरह के पेमेंट पर यह नियम लागू होगा।
साल के आखिर में ध्यान जरूरी
पार्टनरशिप फर्म्स आमतौर पर ऐसे पेमेंट्स या उनका बड़ा हिस्सा 31 मार्च को, यानी जब अकाउंट बंद होते हैं, तब क्रेडिट करती हैं। इसलिए साल के आखिर में की गई इन एंट्री पर भी TDS काटना जरूरी होगा। साथ ही, अगर साल के दौरान पहले भी कोई पेमेंट या क्रेडिट किया गया है, तो उस पर भी नजर रखनी होगी ताकि कुल मिलाकर कोई कमी न रह जाए।
अगर पूरे साल में पार्टनर के अकाउंट में क्रेडिट या भुगतान की गई कुल राशि ₹20,000 से कम है, तो TDS नहीं कटेगा। लेकिन अगर यह रकम ₹20,000 से ज्यादा है, तो 10% की दर से TDS लागू होगा। एक और बात का ध्यान रखना जरूरी है कि पार्टनर को मिलने वाले प्रॉफिट शेयर पर TDS नहीं लगता।
स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (SMEs) के लिए पार्टनरशिप फर्म एक लोकप्रिय बिजनेस स्ट्रक्चर है। इनमें लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप्स (LLPs) भी शामिल हैं। आमतौर पर पार्टनर की सैलरी और ब्याज साल के आखिर में तय होता है, जब अकाउंट फाइनल होते हैं।
अब इस नए नियम के बाद फर्म्स को ज्यादा सावधानी रखनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि हर पेमेंट पर सही तरीके से TDS काटा जाए, खासकर साल के आखिर में होने वाली एंट्री पर।
पार्टनर्स के लिए भी जरूरी है समझना
सिर्फ फर्म ही नहीं, पार्टनर्स के लिए भी यह बदलाव समझना जरूरी है। अगर TDS सही तरीके से नहीं कटा या कहीं मिसमैच हुआ, तो आगे चलकर टैक्स रिकॉर्ड में दिक्कत आ सकती है या अतिरिक्त टैक्स का बोझ पड़ सकता है।
(लेखक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। वह पर्सनल फाइनेंस खासकर इनकम टैक्स से जुड़े मसलों के एक्सपर्ट हैं)