Daughters Financial Planning: साल 2026 में अपनी बेटी के वित्तीय भविष्य की योजना बनाना अब केवल किसी एक प्रॉडक्ट या स्कीम में पैसा लगाने तक सीमित नहीं रह गया है। आज के दौर में माता-पिता का नजरिया बदल रहा है। अब लक्ष्य केवल पैसा जोड़ना नहीं, बल्कि एक ऐसा इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो तैयार करना है जो शिक्षा, करियर के चुनाव और लंबी अवधि की आत्मनिर्भरता में काम आ सके।
सिर्फ सुरक्षा नहीं, लचीलापन भी है जरूरी
परंपरागत रूप से हम सबसे सुरक्षित निवेश की तलाश करते हैं। 'सुकन्या समृद्धि योजना' (SSY) जैसी सरकारी स्कीमें बचत और टैक्स लाभ के लिए आज भी बेहतरीन हैं। लेकिन लॉकिंग पीरियड इसका एक बड़ा नकारात्मक पहलू है। SSY में पैसा लंबे समय के लिए लॉक हो जाता है। कई बार पढ़ाई या अन्य जरूरतों के लिए पैसे की जरूरत समय से पहले पड़ सकती है, तब इस स्कीम में डाला गया पैसा काम नहीं आता। यही वजह है कि आज के फाइनेंशियल प्लानर सुकन्या समृद्धि योजना को पूरी रणनीति का केवल एक हिस्सा मानने की सलाह देते हैं, न कि इकलौता जरिया।
शिक्षा पर बढ़ रहा सबसे बड़ा खर्च
बेटी के भविष्य की प्लानिंग में उच्च शिक्षा सबसे बड़ा खर्च है। चाहे वह भारत में पढ़े या विदेश में, लागत में जमीन-आसमान का अंतर हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय डिग्रियों और निजी कॉलेजों की फीस तेजी से बढ़ रही है। केवल फिक्स्ड रिटर्न वाली स्कीमों के भरोसे रहना मुश्किल हो सकता है। इसके लिए म्यूचुअल फंड जैसे तरीके एक नया विकल्प बनकर उभरे है। लंबी अवधि में महंगाई को मात देने के लिए SIP के जरिए इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। यह पोर्टफोलियो में लगातार ग्रोथ बनाए रखते है।
कॉलेज की पढ़ाई ही इकलौता लक्ष्य नहीं है। ग्रेजुएशन के बाद दूसरी डिग्री, खुद का स्टार्टअप शुरू करना या पहले घर के लिए डाउन पेमेंट जैसी जरूरतें अचानक आ सकती हैं। अगर आपका सारा पैसा किसी एक लंबी अवधि की स्कीम में लॉक है, तो आप इन जरूरतों को पूरा नहीं कर पाएंगे। इसलिए निवेश का एक हिस्सा ऐसा रखें जिसे जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सके।
इंश्योरेंस भी है बेहद जरूरी
अक्सर माता-पिता निवेश तो करते हैं, लेकिन 'प्योर प्रोटेक्शन' यानी बीमा को नजरअंदाज कर देते हैं। अभिभावक के पास एक पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी होनी चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि अगर खुदा न खास्ता अभिभावक को कुछ हो जाए, तो भी बेटी के भविष्य के लिए तय किए गए वित्तीय लक्ष्य अधूरे न रहें। यह निवेश नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच है।
समय के साथ बदलाव है जरूरी
अब माता-पिता की सोच में एक बड़ा बदलाव आया है। पहले केवल एक बड़ी राशि जमा करके बेटी को सौंपने का विचार होता था, लेकिन अब उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने पर जोर है। बच्चों से बचत के बारे में बात करना, उन्हें निवेश के तरीके बताना और धीरे-धीरे उन्हें फैसलों में शामिल करना जरूरी है। इससे उनमें पैसा मैनेज करने के बारे में जागरूकता आती है।
आज बनाई गई कोई भी योजना अगले 10 या 15 साल तक वैसी ही नहीं रहेगी। शिक्षा के रास्ते और करियर की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं। इसलिए अपनी योजना की समय-समय पर समीक्षा करें और जरूरत के अनुसार उसमें बदलाव करें।
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