Godrej Family Tax-free Settlement: करोड़ों के लेन-देन पर कोई टैक्स नहीं, इस कारण बनी जीरो देनदारी

Godrej Family News: 127 साल पुराने गोदरेज फैमिली ने पिछले हफ्ते खुद को दो ग्रुप में बांटने का ऐलान किया था। गोदरेज फैमिली (Godrej Family) की तीसरी पीढ़ी में आधा दर्जन से अधिक कंपनियों के शेयरों के मालिक बदल रहे हैं। अब सामने आ रहा है कि इस लेन-देन पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा। जानिए टैक्स देनदारी जीरो करने का यह कैसा नियम है और कैसे संभव है?

अपडेटेड May 06, 2024 पर 9:48 AM
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Godrej Family Tax-free Settlement: गोदरेज फैमिली (Godrej Family) की तीसरी पीढ़ी में आधा दर्जन से अधिक कंपनियों के शेयरों के मालिक बदल रहे हैं लेकिन इस लेन-देन पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा। (File Photo- Pexels)

Godrej Family Tax-free Settlement: गोदरेज फैमिली (Godrej Family) की तीसरी पीढ़ी में आधा दर्जन से अधिक कंपनियों के शेयरों के मालिक बदल रहे हैं लेकिन इस लेन-देन पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा। मनीकंट्रोल को यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है। जानकारी के मुताबिक गोदरेज फैमिली ने इस लेन-देन के लिए फैमिली अरेंजमेंट का रास्ता चुना है जो कैपिटल गेन टैक्स लगाने के लिए इनकम टैक्स एक्ट के दायरे के बाहर है। सूत्रों के मुताबिक इस रास्तों को चुनने के लिए गोदरेज रीस्ट्रक्चरिंग सभी शर्तें पूरी करता है।

गोदरेज फैमिली जिस प्रकार का सेटलमेंट कर रही है, उसमें टैक्स देनदारी नहीं बनेगी। ऐसे मामले में काले एंड अदर्स बनाम डिप्टी डायरेक्टर ऑफ कंसालिडेशन मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला समेत कुछ अन्य मानक के तौर पर काम करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने फैमिली अरेंजमेंट्स से जुड़े कई केसेज में चार अहम सिद्धांत रखे जिन्हें इस प्रकार के सेटलमेंट के लिए पूरा करना जरूरी है और गोदरेज सेटलमेंट इन सभी को पूरा करता है।

इन चार शर्तों को पूरा करने के लिए चलते ही नहीं बनेगी टैक्स देनदारी


पहली शर्त तो यही है कि फैमिली अरेंजमेंट में सभी पक्ष प्रत्यक्ष रिश्तेदार होने चाहिए। दूसरी शर्त यह है कि प्रॉपर्टी से जुड़े किसी भी मौजूदा या भविष्य के पारिवारिक विवाद को हल करने और परिवार के बीच पैसों का सही से बंटवारे को सुनिश्चित करने के लिए समझौता किया जाना चाहिए। परिवार में अगर अभी कोई विवाद नहीं हैं तो जरूरी नहीं है कि भविष्य में कोई विवाद न हो तो जरूरी है कि इसे लेकर भी समझौता होना चाहिए।

तीसरी शर्त है कि हर पक्ष को दूसरों के पक्ष में कुछ दावे छोड़ने होंगे। उदाहरण के लिए आदि और नादिर गोदरेज एंड बॉयस में अपनी हिस्सेदारी छोड़ रहे हैं, जबकि जमशेद और स्मिता ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा छोड़ देंगे। चौथी शर्त यह है कि पारिवारिक समझौते में प्रत्येक पक्ष को समझौते में अन्य पक्षों के अधिकारों को मानना होगा। गोदरेज परिवार के सभी सदस्यों ने पहले ही समझौते की शर्तों को स्वीकार कर लिया है।

Godrej Family में किसे क्या मिलेगा?

127 साल पुराने गोदरेज फैमिली ने पिछले हफ्ते खुद को दो ग्रुप में बांटने का ऐलान किया था। इसी को लेकर अब सारी कवायद हो रही है। समझौते के मुताबिक आदि और नादिर गोदरेज और उनकी पीढ़ी को गोदरेज ग्रुप की लिस्टेड कंपनियां मिलेंगी जिनमें गोदरेज इंडस्ट्रीज, गोदरेज प्रॉपर्टीज, गोदरेज एग्रोवेट, गोदरेज कंज्यूमर और एस्टेक लाइफसाइंस शामिल हैं। वहीं दूसरी तरफ जमशेद गोदरेज और स्मिता कृष्णा गोदरेज एंड बॉयस विरासत में मिलेगी जो स्टॉक मार्केट में लिस्टेड नहीं है।

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