कर्नाटक (Karnataka) राज्य विधानसभा ने 45 लाख रुपए से कम कीमत वाले फ्लैटों पर स्टांप ड्यूटी (Stamp Duty) में 2% की कमी करने वाले बिल को पारित कर दिया है, लेकिन रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे बिक्री में मामूली अंतर आएगा, क्योंकि ये सिर्फ एक सीमित कीमत की प्रॉपर्टी के लिए ही है। विधानसभा ने स्टाम्प अधिनियम, 1957 में एक संशोधन पारित किया, जिसमें 20 सितंबर को 35 लाख रुपए से 45 लाख रुपए के बीच की हाउसिंग यूनिट्स पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी को घटाकर 3% कर दिया गया।
2% की कटौती केवल पहली बार रजिस्ट्रेशन पर लागू है। मार्च में, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने राज्य के 2021-22 के बजट में 35-45 लाख रुपए के बीच के अपार्टमेंट के लिए स्टांप ड्यूटी में 2 प्रतिशत की कटौती का प्रस्ताव दिया था।
येदियुरप्पा ने 8 मार्च को कहा था, "किफायती आवास को बढ़ावा देने के लिए, 35 रुपए से 45 लाख रुपए के बीच के अपार्टमेंट के पहले रजिस्ट्रेशन के लिए स्टांप ड्यूटी 5 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।" एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये कदम सीमित है और इसे सभी कैटेगरी की संपत्तियों के लिए होना चाहिए था।
कर्नाटक के नाइट फ्रैंक इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शांतनु मजूमदार ने कहा, "कर्नाटक सरकार के स्टांप ड्यूटी में 2% की कमी करने के निर्णय से रियल एस्टेट क्षेत्र को मामूली बढ़ावा मिलेगा। हालांकि ये कदम निश्चित रूप से प्रगतिशील है, ये केवल बिक्री की मात्रा में मामूली अंतर लाएगा, क्योंकि 2% की सीमा केवल 45L की संपत्तियों के लिए है।"
ये 35 से 45 लाख के प्राइस बैंड में अपार्टमेंट तक ही सीमित है और इससे बहुत कम खरीदारों को फायदा होगा। कटौती सभी खंडों और कीमतों में संपत्तियों के लिए होनी चाहिए। फोरम फॉर पीपुल्स कलेक्टिव एफर्ट्स (FPCE) के महासचिव एमएस शंकर ने कहा कि छूट 1 करोड़ तक के प्लॉट्स, घरों, अपार्टमेंटों के रजिस्ट्रेशन में फैली होनी चाहिए।